Kanpur: सिंदूर स्मृति एकल काव्य गोष्ठी संपन्न, 'आज नदी में पांव डुबोते याद हमें किरणों की आई' जैसे गीतों ने माहौल किया भावुक
कानपुर में एकल काव्य गोष्ठी संपन्न हुई।
कानपुर में गीतकार रामस्वरूप सिंदूर स्मृति एकल काव्यपाठ संगोष्ठी लाजपत नगर में परक्यात गीतकार विनोद श्रीवास्तव के काव्यपाठ से संपन्न हुई।
कानपुर, अमृत विचार। गीतकार रामस्वरूप सिंदूर स्मृति एकल काव्यपाठ संगोष्ठी लाजपत नगर में परक्यात गीतकार विनोद श्रीवास्तव के काव्यपाठ से संपन्न हुई। संगोष्ठी की अध्यक्षता रतन कुमार श्रीवास्तव ने की तथा संचालन एआइआर से जुड़ी रंजना यादव ने किया।
विनोद श्रीवास्तव ने अपना गीत पहला धरती के आंगन में उतर रही शाम, गीत से काव्यपाठ की शरुआत की। उनका गीत आज नदी में पांव डुबोते याद हमें किरणों की आई...ने माहौल को भावुक बना दिया। सुविधाएं तो मिली मगर वितरण की कमी रही..इसके बाद, उन्होंने 'कितने दिन हम और पत्तों के आगे रोये..' गीत सराहा गया।

उन्होंने गीतकार रामस्वरूप सिंदूर से जुड़े संस्मरण भी साझा किए। इसमें मंचीय अनुशासन की किस्सागोई रोचक रही। हरिओम, रंजना, संध्या ने भी काव्यपाठ किया। संगोष्ठी के आयोजक अनिल सिंदूर ने आगंतुकों का स्वागत किया।
इस अवसर पर रिटायर्ड आईपीएस रतन श्रीवास्तव, डॉ. देवेंद्र, गणेश तिवारी, दिनेश वाजपेयी, हरिओम, सतीश माथुर,शैफाली गुप्ता, सौरभ शुक्ला, सुरेश त्रिपाठी, संजय सचान, गोपाल मिश्रा आदि लोग थे।
