लखनऊ : गर्भाशय के मुंह का कैंसर ले रहा हजारों महिलाओं की जान, डॉ.कीर्ति से जानिये बचाव का तरीका

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लखनऊ, अमृत विचार। प्राकृतिक रूप से एक उम्र के बाद महिलाओं में पीरियड्स साइकिल बंद हो जाता है। इस स्थिति को मेनोपॉज कहा जाता है। मेनोपॉज होने के बाद भी यदि महिलाओं को रक्तस्राव हो रहा हो। इसके अलावा कम उम्र की महिलाओं को पीरियड्स होने के बाद महीने के बीच में रक्तस्राव हो रहा हो या फिर फिजिकल रिलेशन के बाद रक्तस्राव होता हो। तो सावधान हो जायें। यह गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) का कैंसर हो सकता है। इस तरह का लक्षण होने पर महिलाओं को तत्काल डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। देर होने पर जीवन को खतरा हो सकता है। यह जानकारी शनिवार को रेडियोथेरेपी विभाग की प्रो. कीर्ति श्रीवास्तव ने दी। वह केजीएमयू में सर्विक्स कैंसर पर आयोजित जागरुकता कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

डॉ.कीर्ति ने बताया कि गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) का कैंसर हर साल भारत में एक लाख से अधिक महिलाओं को अपनी चपेट में लेता। समय पर बीमारी का पता न चलने से प्रत्येक वर्ष 60 से 70 हजार महिलाओं की असमय मौत हो जाती है। ऐसे में महिलाओं को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए जागरुकता की जरूरत है।

क्या करें

प्रो. कीर्ति ने बताया कि इस बीमारी से बचाव का टीका उपलब्ध है। 9 से 15 साल की सभी बच्चियों का टीकाकरण होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा 15 से 26 वर्ष के बीच भी टीकाकरण होता है, लेकिन 9 से 15 वर्ष की आयु तक टीकाकरण हो जाये तो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा अच्छा है।

देर से पता चल रही बीमारी

प्रो.कीर्ति के मुताबिक जो महिलायें इलाज के लिए आ रही हैं, उनमें अधिकतर महिलायें एडवांस स्टेज में इलाज के लिए पहुंचती हैं। यदि समय रहते इलाज के लिए महिलायें आ जायें तो भी उनकी जिंदगी बचाई जा सकती है। इसके लिए उन्होंने एक रास्ता भी सुझाया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि जिन महिलाओं को कोई दिक्कत नहीं है वह भी अपनी जांच डॉक्टर की सलाह पर करायें तो बीमारी होने की संभावना का पता चल जायेगा। इतना ही नहीं यदि बीमारी हो रही होगी तो समय पर इलाज शुरू हो जायेगा। समय पर इलाज मिलने से महिलायें गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकेंगी। 

इस अवसर पर केजीएमयू की डॉ. मृणालिनी वर्मा, लोहिया संस्थान की डॉ.स्मृति अग्रवाल, एसजीपीजीआई की डॉ. शालिनी,केजीएमयू की डॉ.निशा सिंह ने भी जानकारी साझा की। कार्यक्रम में आशा वर्कर,केजीएमयू के पैरामेडिकल एवं नर्सिंग के स्टूडेंट भी मौजूद रहे।

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