लखीमपुर-खीरी: सड़क किनारे चौकियां, खतरे हजार..चैन की नींद नहीं ले पा रहे पुलिस के जवान
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। सड़क किनारे स्थित पुलिस चौकियों पर तैनात पुलिस कर्मियों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। हादसे की आशंका के कारण पुलिसकर्मी रात तो छोड़िए दिन में भी दो घंटे सकून की नींद नहीं ले पाते हैं। उनमें हादसे की आशंका बनी रहती है कि कब कोई वाहन अनियंत्रित होकर पुलिस चौकी में घुस जाए।

जिले में कोतवाली, महिला थाना समेत वर्तमान समय में 28 थाने हैं। इसके अलावा शहर की एलआरपी, मिश्राना, संकटा देवी, रोडवेज, जेल गेट, महेवागंज समेत 24 से अधिक पुलिस चौकियां और कई पुलिस पिकेट हैं। इनमें अधिकतर पुलिस चौकियां और पिकेट हाईवे और मुख्य मार्गों पर हैं। शहर की एलआरपी, ढखेरवा, नकहा, नानक चौकी समेत आठ से अधिक ऐसी पुलिस चौकियां हैं, जो सड़क से सटी हुई हैं।
इन चौकियों पर पुलिस कमिर्यों के रहने के लिए बैरक भी बनी हुई हैं। इन बैरकों में सिपाही ड्यूटी करने के बाद आराम करते हैं। हाइवे किनारे होने के कारण इन पुलिस चौकियों पर हमेशा हादसे का खतरा मंडराया करता है। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस 24 घंटे ड्यूटी करती है।
रात गश्त करने के बाद सुबह लौटकर चौकी पहुंचने पर सिपाही हादसों को लेकर भयभीत रहते हैं। इससे वह दो घंटे भी चौन की नींद नहीं ले पाते। उन्हें हमेशा इस बात का डर सताता रहता है कि पता नहीं कब कौन वाहन किस समय आकर पुलिस चौकी से टकरा जाए। इस वजह से वह दो घंटे भी भरपूर नींद नहीं ले पाते हैं।
चौकियों पर तैनात सिपाहियों का कहना है कि रात भर गश्त करने के बाद जब वह पुलिस चौकी पहुंचकर आराम करने की सोचते भी हैं तो वाहनों की आने वाली आवाज के कारण वह घंटे-दो घंटे भी सो नहीं पाते हैं। साथ में यह भी आशंका बनी रहती है कि कहीं कोई वाहन आकर ठोक न दे। इससे उन लोगों के सिर पर हमेशा खतरा मंडराया करता है। सिपाहियों ने बताया कि पूर्व में एलआरपी, शारदानगर (अब थाना) और बेहजम पुलिस चौकी पर हादसे हो चुके हैं। हालांकि इन हादसों में कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन भवन को नुकसान पहुंचा था।
बैरकों में रहना पसंद नहीं करते सिपाही
हर वक्त खतरा महसूस होने के कारण पुलिसकर्मी चौकी की बैरक में आराम करने से कतराते हैं। वाहनों का शोर शराबा और हादसे की वजह के कारण अधिकतर सिपाही चौकियों पर रहना पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने किराए पर कमरे ले रखे हैं, जहां ड्यूटी के बाद पहुंचकर वह सुकून की नींद लेते हैं। कई सिपाहियों ने अपने परिवारों को भी साथ रखा है।
बेहजम पुलिस चौकी में घुसा था डंपर
थाना नीमगांव की पुलिस चौकी बेहजम लखीमपुर-कस्ता मुख्य मार्ग पर है। इस मार्ग पर पूरी रात वाहनों का आवागमन रहता है। करीब दो साल पहले सुबह करीब छह बजे गिट्टी लेकर लखीमपुर जा रहे डंपर के चालक को झपकी आ गई थी, जिससे डंफर ने पुलिस चौकी का बाथरूम, सामुदायिक शौचालय आदि तोड़ दिया था। गनीमत रही कि बगल से निकले नाले में पहिया पड़ने से ट्रक आगे नहीं बढ़ सका था। यदि नाला न होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

पिकेट में सो रहे दो सिपाही हुए थे घायल
धौरहरा कोतवाली क्षेत्र की शारदा नगर में पिकेट है। यह पिकेट पूर्व में बनी चुंगी में चल रही है। करीब एक साल पहले एक ट्रक अनियंत्रित होकर पिकेट में टकरा गया था, जिससे वहां आराम कर रहे दो सिपाही ट्रक की चपेट में आकर मामूली रूप से चोटिल हो गए थे। हादसे से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। हादसे के बाद से पिकेट के सिपाही हमेशा दहशत में रहते हैं।
एलआरपी चौकी में भी टकरा चुका है ट्रक
एलआरपी पुलिस चौकी शहर की प्रमुख पुलिस चौकी है। यह चौकी पीलीभीत-बस्ती हाईवे से सटी है। पुलिस चौकी के एक तरफ सीतापुर फोरलेन हैं। पूरी रात अन्य प्रदेशों से आने-जाने वाले वाहन दिन रात निकलते हैं। इससे इस चौकी पर हमेशा खतरा मंडराया करता है। पिछले साल एक ट्रक पुलिस चौकी में अनियंत्रित होकर घुस गया था। इससे चौकी की दीवार और मंदिर आदि क्षतिग्रस्त हो गया था। गनीमत रही थी कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
काफी लंबे समय से यह चौकियां स्थापित हैं। इसलिए इनको हटाया जाना मुमकिन नहीं है, जो भी अब नई चौकी बनेंगी या उनका विस्तार होगा तो मार्ग से निश्चित दूरी पर ही बनाई जाएंगी।-नैपाल सिंह, एएसपी
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