शाहजहांपुर: बिछने लगी चुनावी विसात, पसंदीदा दल से टिकट पाने को सूरमा बेकरार

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Edited By Amrit Vichar
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शाहजहांपुर, अमृत विचार: ददरौल विधान सभा उप चुनाव की तारीख जल्द घोषित होने की उम्मीद है। प्रशासन ने चुनाव की तैयारी पूरी कर ली है। इसी के साथ संभावित प्रत्याशी अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए विसात बिछाने लगे हैं। पहले चरण में अपने पसंदीदा दल से टिकट पाने के लिए राजनीतिक सूरमा बेकरार हैं। 

टिकट मांग रहे ज्यादातर नेता अपने अपने हिसाब से अपनी जीत पक्की बता रहे हैं। साल 1967 से लेकर 2022 तक यहां की जनता ने बारी-बारी से लगभग हर दल के नेता को अपनी सर आंखों को बिठाकर विधायक बनाया है। जिसके चलते हर दल के नेता ददरौल विधान सभा को अपनी जमीन बता रहा है। 

टिकट पाने के लिए जोड़ तोड़ से लेकर जातीय कार्ड तक खेलने की तैयारी है। इसके बाद चुनाव जीतने के लिए जोर आजमाइश होगी। दावेदारों में हलचल देखने को मिल रही है। भाजपा और सपा के संभावित दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। लोगों से बात करने के साथ ही जनता से लुभावने वादे करने का दौर शुरू हो गया है। कोई विकास के नाम पर तो कोई विधान सभा में अपनी चुनावी जमीन तैयार बताकर टिकट मांग रहा है।

ददरौल विधानसभा सीट भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह के निधन से खाली हुई है। अब इस पर उप चुनाव कराने की तैयारी है। भाजपा से दिवंगत विधायक मानवेंद्र सिंह के बेटे अरविंद सिंह की दावेदारी सबसे मजबूत है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी से कई नेता टिकट पाने को प्रयासरत हैं। 

जिसके चलते चुनावी गहमा-गहमी बनी हुई है। कई दल बदलू नेता, जो सिर्फ चुनाव के समय ही पार्टी में सक्रियता दिखाते हैं, वह भी दिखाई देने लगे हैं। जबकि कुछ नेताओं की दावेदारी सपा में भी मजबूत मानी जा रही है और इनके नामों को लेकर चर्चा भी हो रही है। सपा से टिकट पाने की जुगत में लगे एक नेता जी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर उनके रिश्तेदारों से करीबी संबंध होने के चलते चर्चा में हैं। 

एक नेता का नाम ददरौल क्षेत्र में कई धार्मिक व सामाजिक आयोजन कराने के चलते चर्चा में है। राजपूत बिरादरी के एक नेता स्वयं को जातीय समीकरण के हिसाब से फिट बताते हुए टिकट मांग रहे हैं। इसी तरह शाहजहांपुर के निवासी एक नेता बीते दिनों अपनी पार्टी के उच्च पदाधिकारियों से लखनऊ में जाकर मिले और चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। 

बताया जा रहा है कि उनसे चुनाव की तैयारी करने के लिए कह दिया गया है। इसके साथ ही तमाम नेता ददरौल क्षेत्र में अक्सर नजर आने लगे हैं। लोगों से आत्मीयता बढ़ा रहे हैं। इस सब के बाद भी माना यही जा रहा है कि भाजपा से दिवंगत विधायक मानवेंद्र सिंह के पुत्र अरविंद सिंह ही प्रत्याशी होंगे, लेकिन सपा, बसपा, कांग्रेस और आप ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि कुछ नामों को लेकर चर्चा अभी से है। सपा से अवधेश वर्मा और नीरज मिश्रा के क्षेत्र भर में होर्डिंग लगाए गए हैं। इससे उनके नामों को लेकर चर्चा है।

भाजपा बनाम महागठबंधन की चर्चा
भाजपा के नेता अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। वह अपना प्रत्याशी भी लगभग तय मान रहे हैं। इसके बाद भी भाजपा बनाम महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर होने की बात कही जा रही है। कहा जा रहा है कि उप चुनाव भाजपा के लिए अहम होगा। सत्ताधारी पार्टी चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सीट पर नजर रहने का अनुमान है।

इन्हीं सब परिस्थितियों को देखते हुए सपा, कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी संयुक्त रूप से एक प्रत्याशी पर दांव लगा सकते हैं। या फिर अपना प्रत्याशी भी उतार सकते हैं। हालांकि जमीन पर सपा और भाजपा के नेता ही दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला भी हो सकता है।

ददरौल की जनता ने बारी-बारी सभी दलों को जिताया
उत्तर प्रदेश विधान सभा के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से ददरौल एक है। 1967 में डीपीएसीओ (परिसीमन आदेश) के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव साल 1967 में ही हुआ था। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 1967 से 74 तक राम मूर्ति आंचल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से ददरौल विधान से विधायक रहे। 1974 में निर्दलीय के रूप में गिरिजा किशोर मिश्र विधायक चुने गए और वह 1977 तक रहे। 

इसके बाद 1977 में निर्दलीय मंसूर अली, 1980 में जनता पार्टी सेकुलर के नजीर अली, 1985 में कांग्रेस के राम औतार मिश्रा, 1991 में जनता दल के देवेंद्र पाल सिंह, 1993 में कांग्रेस के राम औतार मिश्रा, साल 2002 में बहुजन समाज पार्टी के अवधेश कुमार वर्मा, इसके बाद हुए साल 2012 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी से राममूर्ति सिंह वर्मा विधायक चुने गए। साल 2017 में मानवेंद्र सिंह भारतीय जनता पार्टी से ददरौल के विधायक बने। 

वह साल 2022 में भी जीते और विधायक बने। पांच जनवरी 2024 को उनका निधन होने के बाद यह सीट रिक्त हो गई। अब इस पर उपचुनाव कराने की तैयारी है। इस तरह सीट के इतिहास पर नजर डालें तो ददरौल की जनता ने समय-समय पर सभी पार्टियों के प्रत्याशियों को मौका दिया है। अगर सभी पार्टियां यहां अपनी जमीन मजबूत बता रही हैं तो इसका एक कारण यह भी है कि यहां सभी दलों के प्रत्याशियों के माथे पर विजय तिलक लगा है।

ददरौल चुनाव कराए जाने को लेकर प्रशासन की ओर से सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अब यह निर्वाचन आयोग तय करेगा कि उपचुनाव लोकसभा चुनाव के साथ होगा या अन्य तारीखों पर कराया जाएगा---संजय कुमार पांडेय, उप जिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम।

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