Kanpur News: पराली को खेतों में मिलाएं, उर्वरा शक्ति बढ़ाएं... CSA विवि ने किसानों को दिया प्रशिक्षण
कानपुर में सीएसए विवि ने किसानों को प्रशिक्षण दिया।
कानपुर में सीएसए विवि ने किसानों को प्रशिक्षण दिया। पराली को खेतों में मिलाएं, इससे उर्वरा शक्ति बढ़ाएं।
कानपुर, अमृत विचार। पराली किसानों के लिए बड़ी समस्या है। यदि किसान उसे कूड़ा न समझते हुए उसका जानकारीपरक उपयोग करें तो वह खेतों की शक्ति बढ़ाने में कारगर साबित होती है। यह सलाह रविवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर की ओर से चलाए जाने रहे अभियान के दौरान किसानों को दी गई।
पांडेय निवादा गांव में फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानों को बताया गया कि हरा अपशिष्ट पराली खेतों के लिए पौष्टिक भोजन का काम करता है। मृदा वैज्ञानिक डॉ खलील खान ने बताया कि किसान पराली को खेतों में मिलाएं, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति का विस्तार होता है। किसान पराली को बेकार समझकर उसे आग के हवाले कर देते हैं इससे उन्हें दो तरफा नुकसान होता है।
इस कार्य से पर्यावरण तो प्रदूषित होता ही है साथ ही मिट्टी के पौष्टिक तत्व का भी हनन हो जाता है। डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि फसल अवशेष हमारे खेतों की मिट्टी के लिए भोजन का काम करते हैं। जो खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ उस में उत्पादित उपज की गुणवत्ता को भी बढ़ाते हैं।
वरिष्ठ गृह वैज्ञानिक डॉ. मिथिलेश वर्मा ने बताया कि वेस्ट डी कंपोजर से कम समय में पराली को सड़ा कर आगामी फसल बोई जा सकती है। कार्यक्रम में डॉ. निमिषा अवस्थी, डॉ. राजेश राय ने भी विचार व्यक्त किए।
रैली भी निकाली गई
विशेषज्ञ संवाद के बाद एक रैली भी निकाली गई। इस रैली ने गांव के लोगों के बीच अवशेष प्रबंधन के बारे में जागरुकता फैलाई। रैली के बाद किसानों को फसल अवशेषों को आग के हवाले न करने की शपथ भी ली।
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