लखीमपुर-खीरी: दुधवा के चार गैंडे मार्च तक होंगे आजाद, अनुमति मिलने का पार्क प्रशासन कर रहा इंतजार

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Edited By Amrit Vichar
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पलिया कलां, अमृत विचार: दुधवा टाइगर रिजर्व में ऊर्जा संचालित तारों वाले बाड़े में दो स्थानों पर रह रहे गैंडों को रेडियो कॉलर लगाकर स्वच्छंद विचरण हेतु छोड़े जाने में अभी लगभग दो माह का समय लग सकता है। यद्यपि दुधवा प्रशासन द्वारा इसके लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और प्रारंभ में प्रयोग के तौर पर रेडियो कॉलर लगाकर चार गैंडों को स्वच्छंद छोड़े जाने की योजना बनाई गई है।

ज्ञात हो कि वर्ष 1984 में असम और नेपाल के जंगलों से दुधवा नेशनल पार्क के सोनारीपुर रेंज अंतर्गत ऊर्जा संचालित तारों वाले  करीब 21 वर्ग किलोमीटर के घेरे में एक सींग वाले कुछ गैंडों को लाकर रखा गया था। पश्चात इनकी संख्या बढ़ने पर इनमें से कुछ गैंडों को यहीं के छंगा नाला के निकट बने दूसरे घेरे में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां इन दुर्लभ गैंडों की डीएनए प्रोफाइल भी तैयार की गई है। इस समय दोनों परिसरों में मिलाकर कुल 46 गैंडा मौजूद बताए जा रहे हैं।

खास बात यह है कि दुधवा नेशनल पार्क के पूर्व अधिकारी पहले यह मानते थे कि एक सींग वाले भारी भरकम शरीरधारी गैंडे जंगल में दूसरे वन्य जीवों के साथ खुलेआम नहीं रह पाएंगे। इससे गैंडों और दूसरे वन्यपशुओं दोनों को खतरा हो सकता है ।

किंतु पश्चात वन्य पशु विशेषज्ञों से सलाह ली गई और गत दिवस विभिन्न स्थानों से यहां आकर परिस्थितियों को देखने के बाद विशेषज्ञ इस निर्णय पर पहुंचे कि इन गैंडों को अब जंगल में स्वच्छंद विचरण करने के लिए छोड़ा जा सकता है। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से पहले चार गैंडों को रेडियो कॉलर आईडी लगाकर स्वच्छंद वनविचरण हेतु छोड़ा जाय।

हालांकि इसके पश्चात भी दुधवा पार्क प्रशासन एवं विश्व प्रकृति निधि आदि के अधिकारी उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे। यदि यह प्रयोग कामयाब हुआ तो इसे चरणबद्ध तरीके से सभी गैंडों पर लागू किया जाएगा।

प्रशिक्षण पा चुके वनकर्मी
इस योजना को कामयाब बनाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा यहां आकर कुछ वनकर्मियों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है और गैंडों को बेहोश करने के लिए दवा और आईडी कॉलर आदि का प्रबंध भी  डीटीआर प्रशासन द्वारा किया जा चुका है।

रेडियो कॉलर आईडी लगाकर जंगल में पहले चार गैंडों को विशेषज्ञों की निगरानी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से परमीशन मांगी गई है। जो शीघ्र मिलने की आशा है। उन्हें विश्वास है कि यह योजना 31 मार्च से पहले दुधवा में लागू हो जाएगी---डॉ. रंगा राजू टी, उप निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व।

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