Kanpur News: श्री बैकुण्ठ मंदिर, महाराज प्रयागनारायण शिवाला की शान थे पण्डित बद्रीनारायण तिवारी
श्री बैकुण्ठ मंदिर, महाराज प्रयागनारायण शिवाला की शान थे पण्डित बद्रीनारायण तिवारी
बैकुंठ मन्दिर के संस्थापक महाराज प्रयाग नारायण तिवारी के पिता प. रेवतीराम जी तिवारी (रुक्मिणी कृष्ण दास) मकरंदनगर कन्नौज के पण्डित परांकुश दास तिवारी के पुत्र थे।
कानपुर, अनूप शुक्ल (इतिहासकार)। बैकुंठ मन्दिर के संस्थापक महाराज प्रयाग नारायण तिवारी के पिता प. रेवतीराम जी तिवारी (रुक्मिणी कृष्ण दास) मकरंदनगर कन्नौज के पण्डित परांकुश दास तिवारी के पुत्र थे जो मकरंदनगरकन्नौज से कानपुर आकर ब्रह्मचट्टा पटकापुर मे निवास बनाया और यही पर विक्रमी संवत १९०४ मे श्री रूक्मिणी कृष्ण भगवान का मंदिर बनवाया|
रेवतीराम तिवारी जी ने सन् १८५७ ई० की क्रान्ति मे अंग्रेज फौज को रसद का अच्छा प्रबंध किया था जिसके बदले मे मण्डलवाँ , काँधी, महेरा गांव की जागीर मिली और बेटे प्रयागनारायण तिवारी को खजांची का ओहदा दिया गया | क्रान्ति मे नन्हे नवाब की हिस्सेदारी से नाराज अंग्रेजो ने आगामीर की दोनो बीबियों खुर्द महल व खास महल की कोठिया ध्वस्त कर नीलाम कर दिए गये |
जिसका एक बड़ा हिस्सा प. गुरूप्रसाद शुक्ल ने लिया और कैलास मंदिर स्थापित किया | एक हिस्सा प. रेवतीराम तिवारी ने लिया और बैकुण्ठ मंदिर का निर्माण शुरू कराया लेकिन सन् १८५९ ई० मे ५२ वर्ष की आयु मे बैकुण्ठवास हो गया | प्रयागनारायण तिवारी ने पिता की इच्छा के अनुसार मंदिर निर्माण पूर्ण कराकर सन् १८६१ ई० मे उत्सव मनाकर समाज को समर्पित किया |
इसी लब्धप्रतिष्ठ वंश बेल में पण्डित बद्रीनारायण तिवारी जी का नाम शुमार है । पण्डित रेवतीराम तिवारी के पुत्र थे पण्डित प्रयाग नारायण तिवारी । पण्डित प्रयागनारायण जी के मंझले पुत्र जमुनानारायण के पुत्र शेष नारायण तिवारी जी की यशस्वी संतति थे पण्डित बद्री नारायण तिवारी।
नानाराव पार्क फूलबाग में आजादी के वीर सेनानियों का स्मारक और तुलसी उपवन के माध्यम से श्रीराम,तुलसीदास व मानस प्रेमियों का जीवंत स्मारक तथा मानस संगम संस्था के माध्यम से मानस प्रचारक और हिन्दी का मान वैश्विक पटल पर लाने का उनका उद्यम सराहनीय व स्तुत्य है । मेरा नब्बे के दशक में जब परिचय हुआ तभी से तिवारी जी मुझे बहुत स्नेह और सम्मान देते थे। इन्हीं शब्दों के साथ पण्डित बद्रीनारायण तिवारी जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
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