लखनऊ: अभियंताओं और प्रबंधन के बीच वार्ता में नहीं बन सकी सहमति
लखनऊ, अमृत विचार। पूर्वांचल के विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किए जाने से बिजली संगठनों में आक्रोश है। निजीकरण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पॉवर आफिसर्स एसोसिएशन ने शनिवार को पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन से वार्ता की। इस दौरान एसोसिएशन ने बिना निजीकरण किए व्यापक सुधार की बात रखी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पावर कार्पोरेशन …
लखनऊ, अमृत विचार। पूर्वांचल के विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किए जाने से बिजली संगठनों में आक्रोश है। निजीकरण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पॉवर आफिसर्स एसोसिएशन ने शनिवार को पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन से वार्ता की। इस दौरान एसोसिएशन ने बिना निजीकरण किए व्यापक सुधार की बात रखी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन अरविन्द कुमार व प्रबंध निदेशक एम देवराज व उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सेंथिल पांडियन के साथ लगभग एक घंटा वार्ता की।
इस दौरान पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन ने निजीकरण पर मजबूती से प्रबंधन का पक्ष रखा। जिस पर पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अनुसुचित जाति और पिछड़ों के खून में निजीकरण का विरोध है। इसका यह भी कारण है कि इससे आरक्षण पर सबसे बड़ा कुठाराघात होगा। ऐसे में हम हमेशा निजीकरण के विरोध में खड़े रहेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि पूरे देश में निजीकरण की विफलता पर प्रकाश डाला। इस दौरान एमओयू रुट के प्रोजेक्टों के चलते उर्जा सेक्टर को तबाह किए जाने पर आकड़े भी रखे। साथ ही निजीघरानों की पोल खोली। कहा सरकार एक बार सभी बिजली कार्मिकों को एक एजेंडा तैयार कर काम दे।
हम सब सुधार करते हुए 15 प्रतिशत एटीएनसी हानियों पर लाने का लक्ष्य पूरा करेंगे। एसोसिएशन ने टोरंट पावर व एनपीसीएल की विफलता की बात सामने रखी। बताया कि कैसे प्रदेश में निजीकरण के दोनों प्रयोग फेल रहे हैं। फिर भी क्यों सरकार निजीकरण पर आमादा है। आज बिना बिजली खरीदे एमओयू रूट को पांच हजार करोड़ फिक्स्ड चार्ज देना पड़ रहा है। इसके लिए अभियंता कार्मिक नहीं सरकारी और प्रबंधन जिम्मेदार है।
केस्को की सफलता सभी के सामने है, जब कार्मिकों ने ठाना और सुधार किया ऐसे में पूर्वांचल को सुधार कर हम सभी नया कीर्तमान स्थापित कर सकते हैं। बशर्ते प्रबंधन साथ दे। प्रबंधन से वार्ता करने के बाद एसोसिएशन की पांच सदस्यीय प्रतिनिध मंडल ने ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा से उनके आवास पर मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और कहा सरकार निजीकरण का फैसला वापस ले, हम सभी सुधार कर पूर्वांचल को आगे बढ़ाएंगे।
