मुरादाबाद: बहन के हत्यारोपियों को सजा दिलाने को एपीओ बनी विपर्णा

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मुरादाबाद, अमृत विचार। कहते हैं न कि हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता हैं जहां से व्यक्ति अपना लक्ष्य तय कर लेता है। यह बात दीगर है कि कोई अपना लक्ष्य पाने के लिए दृढ़ संकल्प ले लेता है तो कोई बीच रास्ते से भटक जाता हैं। हालांकि यहां हम बात कर …

मुरादाबाद, अमृत विचार। कहते हैं न कि हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता हैं जहां से व्यक्ति अपना लक्ष्य तय कर लेता है। यह बात दीगर है कि कोई अपना लक्ष्य पाने के लिए दृढ़ संकल्प ले लेता है तो कोई बीच रास्ते से भटक जाता हैं। हालांकि यहां हम बात कर रहे हैं ऐसी नारी की जिन्होंने अपनी बहन के हत्यारोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए वकालत को चुना। इतना ही नहीं उन्होंने सहायक अभियोजन अधिकारी की परीक्षा के साथ ही उसका प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया। यह दृढ़ संकल्पित नारी हैं बदायूं के उझारी की रहने वाली विपर्णा गौड़, जिन्होंने वकालत की डिग्री तो वर्ष 2005 में ले ली थी लेकिन प्रैक्टिस करने में दिलचस्पी नहीं ली।

एपीओ के प्रशिक्षण में टॉपर बनी विपर्णा
बदायूं के उझारी में रहने वाली विपर्णा गौड़ ने भीमराव अंबेडकर अकादमी में चले सहायक अभियोजन अधिकारी के लिए चले तीन माह के प्रशिक्षण में पहला स्थान हासिल किया। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण सुजानवीर सिंह ने उनको पुरस्कृत किया। इस समारोह के बाद विपर्णा ने जब मीडिया से बात की तो उनका एक ऐसा दर्द छलक कर आया जो उनकी इच्छा शक्ति को मजबूती दे रहा था। एपीओ बनने के पीछे उनकी हकीकत काफी जटिल थी, वह अपनी ऐसी बहन के हत्यारोपियों को सजा दिलाना चाहती हैं, जिसकी हत्या के आरोप में खुद विपर्णा की एक और बड़ी बहन और उसका पति फंसा हुआ है।

कोर्ट से निकलते वक्त कर दी गई थी बड़ी बहन की हत्या
मीडिया से बात करते हुए विपर्णा ने बताया कि वह पांच बहने थी। वह सबसे छोटी हैं, पिता रामेंद्र नाथ शर्मा जमींदार थे, जिनकी मौत हो चुकी है। बड़ी बहन साधना शर्मा बदायूं कोर्ट में डीजीसी क्रिमिनल थीं। विपर्णा ने बताया कि वर्ष 2016 में उनकी बहन साधना की कोर्ट से निकलते वक्त हत्या कर दी गई थी। जिस दिन वह घटना हुई उस दिन तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव बदांयू में रैली कर रहे थे। संपत्ति विवाद में हुई इस हत्या में उनकी चौथे नंबर की बहन श्रद्धा गुप्ता और उनके पति श्रवण गुप्ता का नाम सामने आया था। विपर्णा के अनुसार बहन के हत्यारोपियों को सजा दिलाने के लिए उन्होंने चार साल पहले वकालत को अपना पेशा बनाया। बहन और उनके पति का नाम आने के बाद भी पुरजोर तरीके से पैरवी की और सभी को जेल भिजवाया, फिलहाल वह जमानत पर हैं। वर्ष 2015 में ही उन्होंने सहायक अभियोजन अधिकारी बनने की परीक्षा पास कर ली थी। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सभी कानूनी दांव-पेंच बारीकी से सीखे। उन्होंने बताया कि बड़ी बहन के हत्यारोपियों को सजा दिलवाने के साथ ही उनके पास आने वाले हर पीड़ित को हर संभव न्याय दिलवाना उनकी प्राथमिकता है।

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