शाहजहांपुर: नहीं सुनी गई तो आत्मदाह करने पहुंच गया दिव्यांग, पुलिस ने थाने में बुलाकर पीटा

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Published By Vishal Singh
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पीड़िता का पुलिस पर आरोप लगाते हुए वीडियो हो रहा वायरल

बंडा, अमृत विचार। विवादित जमीन पर हो रहे निर्माण को रुकवाने के लिए थाने पहुंचे दलित दिव्यांग की पुलिस ने जब बात नहीं सुनी तो वह पेट्रोल की एक बोतल लेकर बंडा चौराहे पर आत्मदाह करने पहुंच गया। पीछे से पहुंची पुलिस उसे थाने ले आई। आरोप है कि थाने में पुलिस ने उसकी पिटाई कर दी। बाद में पुलिस और लेखपाल गांव पहुंचे, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं कर सके। पुलिस की ओर से पिटाई किए जाने की पीड़ा उजागर करते हुए पीड़ित का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

गांव सिंगापुर पनई निवासी सोलंकी ने बताया कि वह एक दलित जाति से है और शरीर से 90 प्रतिशत दिव्यांग है। आरोप लगाया कि उसकी जगह पर एक जनप्रतिनिधि कब्जा कर रहा है।

इसी जमीन को लेकर मुकदमा भी चल रहा है। जनप्रतिनिधि उसकी जगह पर जबरन निर्माण कार्य करवा रहा है, जिससे परेशान होकर वह कई शिकायतें भी कर चुका है, लेकिन अब तक उसकी समस्या का निस्तारण नहीं हो सका है। मंगलवार दोपहर को वह बंडा थाने में विवादित भूमि पर हो रहे कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचा। आरोप है कि यहां थाना प्रभारी ने उसकी बात नहीं सुनी।

काफी देर तक थाने में खड़े रहने के बाद वह आत्महत्या कर लेने की बात कहकर थाने से चल दिया और उसने एक बोतल में पेट्रोल खरीद लिया। वह जैसे ही चौराहे पर पहुंचा दो सिपाही और एक होमगार्ड उसे अपने साथ थाने बुला ले गए और कहा कि साहब ने बुलाया है। तुम्हारी समस्या का निस्तारण किया जाएगा। इस पर वह वापस थाने आ गया। आरोप है कि पुलिस वाले उसे कार्यालय के पीछे बनी गैलरी की तरफ ले गए, जहां कैमरे नहीं लगे हुए हैं, वहां पर उसे तीन चार तमाचे जड़ दिए और मुकदमा लिखकर जेल भेज देने की धमकी दी।

दिव्यांग को पीटते समय कुछ मीडियाकर्मी मौके पर पहुंच गए, जिस पर पुलिस कर्मी उसे छोड़कर बाहर आ गए। इसके बाद पीड़ित ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां की। उसने कहा कि वह जमीन की शिकायत लेकर कभी भी थाने नहीं आएगा। उसके हिस्से की 54 डिसमिल जगह और साइकिल ही उसका सहारा है, जिसके सहारे वह अपना जीवन यापन कर रहा है। इस दौरान थाने में अपनी फरियाद लेकर आए अन्य फरियादियों के चेहरे की रंगत उड़ गई।

मीडियाकर्मियों के पहुंचने के बाद थाना प्रभारी ने लेखपाल को मौके पर बुलाया और पीड़ित के गांव पहुंचे। जहां लेखपाल ने मौखिक जांच करते हुए पीड़ित से दो दिन का समय मांगा है। जबकि थाना प्रभारी ने निर्माण हो रहे कार्य को बंद न करवाते हुए एसडीएम पुवायां से नाप करने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।

कई वर्ष पहले पट्टे पर मिली थी जमीन
दिव्यांग ने बताया कि उसके पिता को गांव में कई वर्ष पहले पट्टे पर जमीन मिली थी, जिसके बाद वह खतौनी में भी चढ़ गई। पीड़ित ने बताया कि उसका एक हाथ ही काम करता है। बूढ़ी मां उसे कपड़े पहनाती हैं, वह बड़ी ही मुश्किल से ट्राई साइकिल से उतरकर अपने बिस्तर तक जा पाता है। आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि लगातार उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

दो वर्ष से लगा रहा थाने के चक्कर
लगभग दो वर्षों से वह बंडा थाने सहित दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। यहां तक कि वह मुख्यमंत्री के कार्यालय तक जा चुका है लेकिन जनप्रतिनिधि सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा है, जिसके चलते उसकी कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। पुलिस राजस्व का मामला बताकर अपने हाथ पीछे खींच लेती है और राजवस्कर्मी कोर्ट का मामला बताकर उसकी समस्या को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

अभी मामला पूरी तरह से संज्ञान में नहीं है, मामले की जांच कराई जाएगी, इसमें जो दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी-पंकज पंत, सीओ, पुवायां।

जमीन संबंधी विवाद कोर्ट में चल रहा है, अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता, मुकदमे की स्थिति देखकर ही कुछ बताया जा सकता है-संजय कुमार पांडेय, एसडीएम पुवायां।

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