Bareilly News: नगर निगम का दावा निकला झूठा, बिजली विभाग ने कहा- हमारा कोई बैंक खाता नहीं हुआ सीज

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। नगर निगम की टैक्स वसूली की व्यवस्था भी झूठे और हवाई दावों पर चल रही है। बुधवार को नगर निगम के अफसरों ने 65 करोड़ के बकायादार बिजली विभाग के पांच बैंक खातों को सीज करने का दावा किया था लेकिन बृहस्पतिवार को खुद बिजली विभाग ने साफ किया कि उसका एक भी खाता सीज नहीं किया गया है। नगर निगम से इस बारे में नोटिस जरूर जारी किया गया था।

बिजली विभाग नगर निगम के सबसे बड़े बकायादारों में है। करीब 65 करोड़ के बकाया की अदायगी के लिए नगर निगम हर साल का बिल जारी करता है लेकिन बिजली विभाग इस बकाया का न पूरा भुगतान कर रहा है न आंशिक। इस बार फिर 15 दिन पहले नगर निगम ने नोटिस जारी किया लेकिन बिजली विभाग ने उसका कोई जवाब तक नहीं दिया। इसके बाद बुधवार को नगर निगम ने मीडिया को सूचना जारी की कि बिजली विभाग के पांचों बैंक खातों को सीज कर दिया गया है।

बिजली विभाग के कर्मचारियों में इस खबर से खलबली मची तो बृहस्पतिवार को अधिशासी अभियंता अमित आनंद ने साफ किया कि नगर निगम ने विभाग का कोई खाता सीज नहीं किया है। सिर्फ एक नोटिस जारी किया गया है जिस पर शुक्रवार को नगर निगम अफसरों से बकाया के संबंध में बात की जाएगी।

बकाया तो नगर निगम पर भी है, पर कितना ये पता नहीं
नगर निगम के नए भवन में स्थापित आई ट्रिपल सी में इस्तेमाल होने वाली बिजली के बिल का भुगतान स्मार्ट सिटी कंपनी कर रही है। नगर निगम परिसर का बिजली बिल कितना है, बताया जा रहा है कि इसका कोई बिल ही नगर निगम में नहीं आया है। नगर निगम पर बिजली का कुल कितना बकाया है, इसकी जानकारी भी नगर निगम में नहीं है। यह जरूर कहा जा रहा है कि दोनों तरफ से समायोजन के बाद भी नगर निगम का बिजली विभाग पर बकाया बना रहेगा।

नगर निगम के अनुदान से ही कट जाती है बिजली के बिल की रकम
स्ट्रीट लाइट की बिजली का बिल नगर निगम अदा करता है लेकिन इस बिल की रकम शासन से नगर निगम को दिए जाने वाले अनुदानों में ही समायोजित कर ली जाती है। स्थानीय स्तर पर बिजली विभाग को सिर्फ यह प्रमाणित करना होता है कि उसे बिल की अदायगी हो गई है। इस तरह की सुविधा बिजली विभाग की ओर से नगर निगम के लिए नहीं है। यही वजह है कि बिजली विभाग पर भारी टैक्स बकाया हो गया है और वह इसे अदा करने में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

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