UP Board Exam: बोर्ड परीक्षा क्यों होती, जीवनी याद करने से क्या होगा...मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में बच्चे पूछ रहे रोचक सवाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कानपुर में मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में बच्चे पूछ रहे रोचक सवाल

कानपुर, अमृत विचार। यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में परीक्षार्थियों की ओर से तमाम प्रश्न पूछे जा रहे हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही मोड से परीक्षार्थी जुड़ रहे हैं। परीक्षा का डर, भूल जाने की प्रवृत्ति और तनाव के बीच बच्चे कुछ ऐसे रोचक प्रश्न भी पूछ रहे हैं जो मनोवैज्ञानिकों के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। ऐसे प्रश्नों को मनोवैज्ञानिक ‘भ्रम’ और ‘डर’ से उपजे प्रश्न मान कर काउंसिलिंग कर रहे हैं।  

यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए जनवरी महीने से जिले में काउंसिलिंग सेल की सुविधा दी गई है। शिक्षा विभाग की ओर से इसे ऑनलाइन मोड से भी जोड़ दिया गया है। चुन्नीगंज स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में 300 से अधिक कॉल आ चुकी हैं। मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. नरेश चंद्र ने बताया कि गंभीर काउंसिलिंग के बीच कई फोन ऐसे आए जिन्हें सुन काउंसिलिंग केंद्र का माहौल आनंद से भर गया। 

जीवनी याद करने से क्या फायदा

पनकी इलाके से हाईस्कूल के एक छात्र ने प्रश्न पूछा कि ‘सर यह जीवनी याद करने से आगे क्या फायदा होगा, बहुत प्रयास करने के बाद भी याद नहीं हो रही है, इसे कोर्स में क्यों रखा जाता है’। इस तरह के प्रश्न पर केंद्र की ओर से बच्चे को अंकों के महत्व को जोड़कर उत्तर दिया गया।   

बोर्ड परीक्षा क्यों ली जाती है

आजाद नगर के हाई स्कूल के एक छात्र ने प्रश्न किया कि ‘सर यह बोर्ड परीक्षा क्यों ली जाती है, जब हर क्लास में हम लोग परीक्षा देते हैं तो इस परीक्षा को भी स्कूल में ही कराया जाए’ इस प्रश्न पर मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र से बच्चों को बोर्ड परीक्षा का महत्व बताया गया। 

कटिंग बहुत हो गई, मैं फेल हो जाऊंगा क्या

निराला नगर से इंटर की एक छात्रा ने फोन कर पूछा कि ‘सर, आंसर देते हुए पेपर में कटिंग बहुत हो गई है, कोचिंग में कहा जा रहा है कि नंबर कम आएंगे ऐसा है क्या’ इसके जवाब में काउंसलर ने छात्रा को बताया कि सुलेख का महत्व तो पड़ता है, लेकिन कटिंग के बाद भी सही उत्तर के नंबर मिलते हैं। 

ऐसे प्रश्नों की भरमार है

मनोविज्ञान केंद्र की सहायक मनोवैज्ञानिक संध्या शुक्ला ने बताया कि ऐसे भी प्रश्नों की भरमार है जिनमें बच्चों के भीतर परीक्षा का डर साफ झलकता है। काउंसिलिंग से उस डर को दूर किया जाता है। 

सर, पूरे साल पढ़ाई की थी, अब सब भूल गया हूं
पेपर में सब अच्छा लिखा अब लगता है गलत उत्तर दिए
मै स्पोर्ट्स में अपना भविष्य बनाना चाहता हूं, घर वाले नहीं मान रहे
पेपर देते जाते समय बहुत डर लगता है क्या करूं
सर, पेपर के एक दिन पहले नींद नहीं आती है
सर, डर लगता है कि यदि मैं फेल हो गया तो क्या होगा

2 महीने से चल रहा है काउंसिलिंग सेल
300 कॉल अब तक दो महीने में आईं
43 बच्चों ने किया फोन 22 फरवरी के बाद 

ये भी पढ़ें- Kanpur: अवैध संबंधों का शक...पति ने पत्नी पर फेंका टॉयलेट क्लीनर, पीड़िता बोली- नशे में धुत होकर रोज करता झगड़ा

संबंधित समाचार