Kanpur: 367 करोड़ का अधूरा ‘ताजमहल’ किसलिए बनाया...GSVM प्रशासन को निर्माणाधीन इमारत देने के लिए बनाई गई थी योजना

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में जीएसवीएम प्रशासन को निर्माणाधीन इमारत देने के लिए बनाई गई थी योजना

कानपुर, अमृत विचार। पांडु नगर स्थित राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन बिल्डिंग को लेने की योजना जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ.आरती लाल चंदानी ने बनाई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली। ऐसा तब हुआ, जब प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने खुद निरीक्षण कर इस निर्माणाधीन भवन को मेडिकल कॉलेज में शामिल करने की योजना बनाई थी। 

कानपुर पहले संगठित श्रमिकों का शहर था। प्रदेश के उद्योग बंधुओं की जान इस शहर में बसती थी। इसी कारण कानपुर को पूरब का मैनचेस्टर कहा जाता था। 

यहां पर श्रमिकों की संख्या अधिक होने पर पांडु नगर में वर्ष 2007 से 367 करोड़ रुपये लागत से पांडु नगर राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल के पीछे मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन यह निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अधिकारी और लखनऊ व दिल्ली में बैठे आला अफसर यह तक नहीं तय कर सके कि निर्माणाधीन बिल्डिंग में बनाना क्या हैं और  367 करोड़ बिल्डिंग बनाने में लगा दिए गए। 

पहले मेडिकल फिर डेंटल कॉलेज दोनों प्रस्ताव फेल

सबसे पहले यहां पर राज्य कर्मचारी बीमा निगम का मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए निर्माण कार्य शुरू किया गया था। मेडिकल कॉलेज का ढांचा तो तैयार कर दिया गया है, लेकिन मेडिकल कॉलेज के मानकों पर फिट नहीं बैठने पर ईएसआईसी अधिकारियों का प्लान कैंसिल हो गया। इसके बाद तय किया गया कि क्यो न यहां पर डेंटल कॉलेज बना दिया जाए, लेकिन अधिकारियों की यह मंशा भी पूरी नहीं हो सकी। अधिकारियों के दोनों प्लान फेल हुए तो किरकिरी होने लगी। इससे बचने के लिए यहां पर सुपर स्पेशिएलिटी बनाने का सपना देखा गया। 

सुपर स्पेशिएलिटी की आठ साल पहले रखी आधारशिला

बीमा अधिकारियों ने छह अक्टूबर 2016 को तत्कालीन केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय से यहां सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल की आधारशिला रखवा दी। लेकिन केंद्रीय मंत्री के आधारशिला रखने के बाद भी श्रामिक व बीमित लोगों को इलाज आज तक नहीं मिल पा रहा है। 

भवन निर्माण एजेंसी की होनी चाहिए जांच 

पांडु नगर में पहले मेडिकल कॉलेज और उसके बाद सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल बनाने वाली भवन निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव को तय करनी चाहिए। इसके साथ ही निर्माण में खर्च हुए श्रमिकों के नाम पर करोड़ों रुपये कहां और किस मद में खर्च किए गए, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

यह निर्माण कार्य तब अधूरा पड़ा है, जब केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कुछ जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का दावा कर रही है। ऐसे में यहां पर मेडिकल कॉलेज या सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल या डेंटल कॉलेज खुलने पर हजारों लाभार्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का लोड कम हो सकेगा। 

प्रमुख सचिव की योजना भी धरातल पर नहीं उतर सकी 
 
पांडुनगर में बने इस भवन को लेने की जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की योजना किसी काम नहीं आ सकी। जबकि प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार, कॉलेज प्रबंधन के अधिकारी अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर इसे कॉलेज में शामिल करने की योजना बना चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद अभी तक कुछ हो नहीं सका है। सबसे पहले पूर्व प्राचार्य डॉ.आरती लालचंदानी ने योजना बनाई थी। लेकिन उनकी इस योजना को तवज्जो नहीं दी गई।

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