हरदोई: जच्चा-बच्चा की मौत, शव को बाहर निकाल डाला नर्सिंग होम में ताला, स्टाफ ने परिजनों से की गाली-गलौज

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Edited By Amrit Vichar
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हरदोई। शहर के एक नर्सिंग होम में गलत इलाज होने से जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। उसके बाद दोनों के शवों को बाहर निकाल कर नर्सिंग होम में अंदर से ताला डाल दिया गया। इतना ही नहीं जब घर वाले मौत का मातम मना रहे थे तो उन्हे गाली-गलौज करते हुए वहां से भगा दिया गया।

बताया गया है कि हरियावां थाने के भदेवरा निवासी इलियास ने अपनी 23 वर्षीय पत्नी शिवानी को प्रसव पीड़ा होने पर आशा बहू सरोजनी के कहने पर उसे शहर में जिंदपीर चौराहा ओवर ब्रिज के पास एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। जहां मंगलवार को उसके ऑपरेशन से प्रसव हुआ, उसके कुछ देर बाद बच्चे की मौत हो गई।

जैसा कि घर वालों का कहना है कि बेहोशी का इंजेक्शन देने के बाद ऑपरेशन हुआ और ऑपरेशन होने के काफी देर बाद भी शिवानी को होश नहीं आया, जब उसकी और हालत बिगड़ी गई। इस बारे में जब वहां मौजूद घर तो वहां के स्टाफ को बताया, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया, नतीजतन शिवानी ने भी वहीं पर दम तोड़ दिया।

इसके फौरन बाद किसी तरह के बवाल से डर कर दोनों के शवों को बाहर निकाल कर नर्सिंग होम के गेट में अंदर से ताला डाल दिया गया। जच्चा-बच्चा की मौत होने पर घर वाले रोते-बिलखते हुए मातम मना रहे थे। वहां का स्टाफ हमदर्दी दिखाने के बजाय साथ गाली-गलौज करने लगा। घर‌ वालों का कहना है कि फिलहाल उन्होने पुलिस को तहरीर नहीं दी है,उधर पुलिस का कहना है कि तहरीर आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दम निकलने के बाद भी रिफर करने का चला दांव

हरदोई। नर्सिंग होम में आॅपरेशन के कुछ देर बाद बच्चे और फिर उसके बाद जच्चे की मौत हो गई। शिवानी के पति इलियास का कहना है कि उसकी पत्नी जच्चे की मौत होने के बाद भी वहां के स्टाफ ने उससे मरीज़ को रिफर करते हुए कहीं और ले जाने को कहा। लेकिन जब उनका दांव नहीं चला तो उन्होने शव को बाहर निकाल कर ताला डाल दिया।

कुछ पल के लिए आई खुशी दे गई ज़िंदगी भर का गम

हरदोई। इलियास की शादी करीब ढ़ाई साल पहले कोतवाली देहात के गरीब पुरवा निवासी मोहम्मद साबिर की पुत्री शिवानी के साथ हुई थी। शादी के बाद घर वाले किसी नन्हे मेहमान के आने के इंतज़ार में थे,काफी इंतज़ार के बाद वह मौका आया,घर वाले काफी खुश थे, मंगलवार को शिवानी ने नन्ही परी को जन्म दिया तो हर किसी के चेहरे खिल उठे, लेकिन कुछ पल के लिए आई खुशी ज़िंदगी भर के लिए गम दे कर चली गई।

आशा बहू ने सरकारी अस्पताल में जाने से रोका था

हरदोई। शिवानी के घर वालों की बातों पर यकीन करें तो जब प्रसव का मौका आया तो आशा बहू सरोजनी ने कहा था कि सरकारी अस्पताल में सही से इलाज नहीं होता है,उसी ने नर्सिंग होम में गारंटी से बेहतर इलाज कराने का दम भरा था,घर वालों ने भी उसकी बात पर यकीन कर लिया,लेकिन किसी पता था कि घर से जा रही शिवानी फिर कभी वापस नही आएगी।

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