बरेली: भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के बेटे और पौत्र पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज, जानें मामला 

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Edited By Amrit Vichar
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रजिस्ट्री कार्यालय में गलत तथ्य पेश कर करोड़ों का विवादित प्लॉट औने-पौने में खरीदने का आरोप

बरेली, अमृत विचार। भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल के बेटे मनीष अग्रवाल और पौत्र पार्थ अग्रवाल समेत चार लोगों के खिलाफ विवादित जमीन खरीदने के आरोप में कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। रामपुर बाग में स्थित इस जमीन की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है जिसका केस न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि गलत तथ्य पेश कर चार साल पहले गुपचुप ढंग से इस प्लॉट की रजिस्ट्री करा ली गई।

एफआईआर प्रेमनगर इलाके शाहबाद दीवानखाना में रहने वाले विजय कुमार जालान की ओर से दर्ज कराई गई है। उनका कहना है कि रामपुर बाग में होली हॉस्पिटल के पास 612 वर्ग गज का प्लॉट उनकी पैतृक संपत्ति है जो उनके माता-पिता के नाम दर्ज था। काफी समय से इस प्लॉट को लेकर उनका अपने भाई कैलाश जालान और हरिराम जालान से विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय में केस विचाराधीन होने के कारण इस प्लॉट को कोई खरीद नहीं रहा था।
विजय कुमार जालान का आरोप है कि 16 जनवरी 2020 को राजेश अग्रवाल के बेटे मनीष अग्रवाल और पौत्र पार्थ अग्रवाल ने गुपचुप ढंग से कैलाश जालान और हरिराम जालान से इस प्लॉट की रजिस्ट्री करा ली। विजय का कहना है कि न्यायालय में प्लॉट पर मालिकाना हक तय होने तक कानूनन जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती थी लेकिन उनके भाइयों ने रजिस्ट्री कार्यालय में गलत तथ्य पेश कर रजिस्ट्री करा ली। वरिष्ठ भाजपा नेता के बेटे ने अपने रसूख का भी इस्तेमाल किया।

इस रजिस्ट्री में उन्होंने यह भी झूठा दावा किया है कि जमीन के कब्जे और चौहद्दी को लेकर कोई विवाद नहीं है। विजय ने यह भी आरोप लगाया है कि इस प्लॉट की रजिस्ट्री सिर्फ 40 हजार रुपये वर्ग मीटर की दर से कराई गई जबकि उसकी कीमत दुगने से भी ज्यादा है।

राजनीतिक हल्कों में उभरा सवाल... चार साल से चक्कर काट रहे थे जालान, अब अचानक कैसे दर्ज हो गई रिपोर्ट
विजय कुमार जालान के करोड़ों कीमत के विवादित प्लॉट की गुपचुप ढंग से रजिस्ट्री करा लेने का मामला चार साल से भी ज्यादा पुराना है। इन चार सालों में जालान ने पुलिस-प्रशासन के तमाम उच्चाधिकारियों के साथ गोरखपुर जाकर मुख्यमंत्री दरबार का भी चक्कर लगाया लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। बृहस्पतिवार को अचानक उनकी ओर से रिपोर्ट दर्ज हुई, वह भी सीओ के आदेश पर तो राजनीतिक हल्कों में इस पर कई सवाल उभरने शुरू हो गए।

विजय कुमार के मुताबिक उनके प्लॉट की गैरकानूनी ढंग से रजिस्ट्री 16 जनवरी 2020 को कराई गई थी और तभी से वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए चक्कर काट रहे हैं। इन चार सालों में उन्होंने बरेली में तैनात रहे लगभग हर उच्चाधिकारी से शिकायत की। गोरखपुर में मुख्यमंत्री के मठ भी पहुंचे जहां मुख्यमंत्री नहीं मिले तो प्रार्थनापत्र देकर लौट आए। इसके अलावा दर्जन भर से ज्यादा बार आईजीआरएस पर भी शिकायतें कीं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

हर स्तर पर उन्हें एक ही जवाब दिया जाता रहा कि न्यायालय में केस विचाराधीन है, इसलिए पुलिस या प्रशासन इसमें कुछ नहीं कर सकता। कुछ समय पहले वह एसपी सिटी राहुल भाटी से मिले थे तो उन्होंने भी उन्हें यही जवाब देकर लौटा दिया था। इसके बाद एसएसपी कार्यालय में शिकायत की तो जांच कराने की बात कही गई लेकिन न कोई जांच हुई न रिपोर्ट दर्ज की गई।

जालान के मुताबिक कुछ ही दिन पहले वह सीओ फर्स्ट संदीप कुमार सिंह से मिले तो उन्होंने उनकी बात गंभीरता से सुनी और थाने की पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दे दिया। इंस्पेक्टर से यह भी कहा कि वह इधर-उधर चक्कर लगाकर बहुत परेशान हो चुके हैं लिहाजा उनकी रिपोर्ट फौरन दर्ज की जाए। इसके बाद उन्होंने बृहस्पतिवार को थाने जाकर तहरीर दी। फौरन उनकी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। बहरहाल, इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक हल्कों में अलग-अलग नजरिये से देखा जा रहा है।

अब सीओ बोले- चूक हो गई
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बृहस्पतिवार शाम सीओ संदीप कुमार सिंह ने बताया कि यह मामला चूक से दर्ज हो गया। उन्होंने बताया कि विजय कुमार जालान ने उन्हें जो प्रार्थना पत्र दिया था उसमें भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल के बेटे मनीष अग्रवाल और पौत्र पार्थ का नाम नहीं था। विजय ने सिर्फ अपने भाइयों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था, इसी प्रार्थनापत्र पर उन्होंने थाने को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश कर दिया था। थाने के मुंशी ने एफआईआर में भाजपा नेता के बेटे और पौत्र का भी नाम शामिल कर दिया।

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