Bareilly News: रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुछ गंभीर होने की ओर इशारा कर रही कुलपति और कुलसचिव की जंग

Amrit Vichar Network
Published By Moazzam Beg
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बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. केपी सिंह और कुलसचिव अजयकृष्ण यादव के बीच शुरू हुई जंग अंदरखाने कुछ गंभीर घटित होने की ओर इशारा कर रही है। कुलपति के तीन दिन के अंदर कुलसचिव के खिलाफ जारी किए गए तीन आदेश सार्वजनिक हुए हैं। 

हाल ही में जारी एक आदेश से खुलासा हुआ है कि नगर निगम ने विश्वविद्यालय पर जो तीन करोड़ का जुर्माना ठोका है, उसके भी जिम्मेदार कुलसचिव हैं। इससे पहले कुलसचिव के आदेश से विश्वविद्यालय के अनुभागों से महत्वपूर्ण फाइलें तय प्रक्रिया की अनदेखी करके ले जाए जाने का खुलासा हुआ था। यह अब तक साफ नहीं हुआ है कि ये फाइलें किससे संबंधित थीं और उनका क्या इस्तेमाल किया गया।

नगर निगम ने टैक्स का भुगतान न करने पर पिछले सप्ताह रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैंक खाते सीज कर दिए था। इन खातों में करीब 11.81 लाख रुपये की धनराशि जमा है। कहा जा रहा है कि टैक्स न जमा होने से करीब तीन करोड़ का ब्याज भी बढ़ गया, जो विश्वविद्यालय के लिए बड़ी आर्थिक क्षति है। 

दरअसल, नगर निगम की ओर से निर्धारित टैक्स पर विश्वविद्यालय की ओर से आपत्ति की गई थी। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी की ओर से 27 जून को कुलसचिव को पत्र लिखा गया था जिसमें 11 और 21 अप्रैल के पत्रों का हवाला देते हुए बताया गया था कि हाईकोर्ट के आदेश पर कुलसचिव के प्रत्यावेदन का निस्तारण कर दिया गया है।

इसी पत्र में उल्लेख किया गया था कि बार-बार मौखिक और लिखित रूप से मांगने के बाद भी विश्वविद्यालय के भवनों और खेल मैदान के क्षेत्रफल के बारे में जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई है। अपर नगर आयुक्त के 22 जून 2023 के आदेश के क्रम में हाईकोर्ट से निर्धारित बिंदुओं का निस्तारण नगर निगम एक्ट के तहत नगर आयुक्त ने कर दिया है, इसके बाद कुलसचिव के प्रत्यावेदन पर पुनर्विचार का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद कुलपति ने भी नौ अगस्त 2023 को कुलसचिव को लिखा। इसमें मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के पत्र का हवाला देते हुए पूछा गया था कि ऐसी भारी चूक किस स्तर पर हुई।

कुलसचिव ने इसका भी जवाब नहीं दिया तो कुलपति ने 22 दिसंबर को फिर पत्र लिखा कि उनकी लापरवाही से विश्वविद्यालय को आर्थिक क्षति हो सकती है और इसके लिए वह जिम्मेदार माने जाएंगे। हालांकि इसके बावजूद कुलचिव ने इस प्रकरण का निस्तारण करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली और विश्वविद्यालय पर नगर निगम ने तीन करोड़ की पेनाल्टी भी लगा दी।

शिक्षकों का वेतन निर्धारण न करने पर भी घिर चुके हैं कुलसचिव
कुलपति ने छह मार्च को एक आदेश जारी कर कुलसचिव के कई आदेशों को निरस्त और विधि शून्य घोषित कर दिया था। इससे पहले उन्होंने पदोन्नत हुए शिक्षकों का वेतन निर्धारण न करने पर भी कुलसचिव के खिलाफ शासन और राज्यपाल को लिखा था। कुलपति का यह आदेश भी शनिवार को सार्वजनिक हुआ है।

कुलसचिव बोले- फाइल अपनी जगह न रहने का मतलब कुछ गड़बड़ है
कुलसचिव अजयकृष्ण यादव का कहना है कि शासन के आदेश के अनुसार कोई भी फाइल एक पटल पर तीन दिन से ज्यादा समय तक नहीं रहनी चाहिए। एक पटल या किसी और जगह अगर कई दिनों तक फाइल रहती है तो साफ है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है। फाइलों की देखरेख की जिम्मेदारी कुलसचिव की होती है। इसी वजह से उन्होंने फाइलों को अनुभाग में रखने का आदेश जारी किया था। 

कुलसचिव का यह भी आरोप है कि उनके लिंक अधिकारी भी गलत बनाए गए, उसके बाद कुछ आदेश भी जारी किए। उनका दूसरा आदेश इसी से संबंधित था लेकिन उसे निरस्त कर दिया गया। बोले, नगर निगम के टैक्स वाले मामले में सिर्फ उनकी नहीं, कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी है। फाइल पर कुछ आपत्ति आई थी, जिसे सही कराया गया।

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