रमजान में खुल जाते हैं जन्नत के दरवाजे : मुफ्ती मोइनुद्दीन 

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Edited By Amrit Vichar
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मरकजी अंजुमन तबलीग अहले सुन्नत जामा मस्जिद के सरपरस्त से बातचीत, कहा - हर मुस्लिम पर फर्ज है रोजा 

अयोध्या अमृत विचार। रमजान का मुबारक महीना वह पाक महीना है जिसमें कुरान मजीद नाजिल हुआ। यानी दुनियां के तमाम इंसानों पर अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत मुकम्मल हुई। यह बयान मरकजी अंजुमन तबलीग अहले सुन्नत जामा मस्जिद टाटशाह के सरपरस्त मुफ्ती मोइनुद्दीन अशरफी मिस्बाही ने पहली रमजान पर दिया। 
   
उन्होंने कहा इस पवित्र महीने की एक फजीलत यह भी है कि इसमें फर्ज़ का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है और नवाफिल का सवाब फर्ज़ के बराबर कर दिया जाता है। इसी महीने में एक रात ऐसी आती है जो हज़ार महीने से अफज़ल है। जिसमें कुरान शरीफ़ मुहम्मद मुस्तफा साहब पर नाजिल हुआ। मुफ्ती मोइनुद्दीन ने बताया कि इस महीने में जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते है और आसमान से खैर बरकत के दरवाज़े खोल दिए जाते है। उन्होंने कहा कि रोजा वह अज़ीम फरीजा है जो इस्लाम के पांच मूल सिद्धांतों में से एक है। जिसको अल्लाह पाक ने अपनी तरफ मंसूब फरमाया और कयामत के दीन रोजे का बदला बिना किसी वास्ते के रोजेदार अल्लाह पाक खुद देगा। 

उन्होंने कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफा साहब की हदीस का मफहुम है कि आप ने फरमाया कि अगर तुम में से हर कोई रमज़ान के रोजो के बारे में जानता तो हर शख्स यह चाहता कि पूरा साल रमजान हो। उन्होंने कहा कि रोजा भूखे प्यास रहने का नाम नहीं है, रोजा इंसान के जिस्म के हर हिस्से का होता है, और है। आंख का रोजा मतलब गलत मत देखो, कान का रोजा गलत मत सुनो, रोजे के दौरान जो बात सबसे खास होती है कि रोजे के समय रोजेदार को कोई बुराई काम न ही करे। रोजा रखने वाले इंसान को हमेशा बुराई से तोबा तोबा करते रहना चाहिए। ज्यादा  से ज़्यादा इसतिग्फार करते रहना चाहिए। गरीबों, बेसहारों की मदद भी करना चाहिए। 

मस्जिदों में शुरू हुई तरावीह, घरों में खिली रमजान की रौनक 
चांद का दीदार होते ही सोमवार रात मस्जिदों में तरावीह के लिए लोग उमड़ पड़े। रात नौ बजे से विभिन्न मस्जिदों में रमजान की तरावीह का दौर शुरू हो गया है। वहीं मंगलवार भोर में सहरी के बाद पहले रोजे की शुरुआत हुई। चांद रात के मौके पर बाजारों में देर रात तक खरीदारी होती रही। मंगलवार को देर शाम तय वक्त पर लोगों ने अफ्तार कर दुआएं कीं। 

रोजा अफ्तार 
शिया 
अफ्तार - 6:23
सहरी - 4:50

सुन्नी 
अफ्तार - 6:09
सहरी - 4:45

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