भरण पोषण के मामले में पति को देने होंगे ठोस साक्ष्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण- पोषण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि एक सक्षम युवा व्यक्ति को पर्याप्त पैसा कमाने और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सामर्थ्यवान माना जाना चाहिए। यह कथन स्वीकार्य नहीं है कि वह पारिवारिक मानक के अनुसार उतना नहीं कमा सकता है, जिससे उसके परिवार का भरण-पोषण हो सके।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्ति को कोर्ट के समक्ष ऐसे ठोस आधार प्रस्तुत करने होंगे जिससे यह सिद्ध हो सके कि वह अपनी पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण के कानूनी दायित्व को पूरा करने के लिए पर्याप्त कमाई करने में असमर्थ है। वर्तमान याचिका प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, ललितपुर द्वारा पारित निर्णय से व्यथित होकर दाखिल की गई है।
साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याची को अतिरिक्त दहेज के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2015 में उसने अपना वैवाहिक घर छोड़ दिया और घरेलू काम करके अल्प कमाई द्वारा अपना भरण-पोषण कर रही थी।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि पति की मासिक आय का एक तिहाई हिस्सा पत्नी और दो बेटियों को भरण-पोषण के रूप में प्रदान करना आवश्यक है, क्योंकि पति कुशल श्रमिक के रूप में लगभग 12000 से 14000 रुपए प्रति माह कमा लेता है। अंत में कोर्ट ने विपक्षी को याची को 2 हजार रुपए और दोनों बेटियों को 1-1 हजार रुपए प्रतिमाह देने का निर्देश दिया। उक्त आदेश न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह (प्रथम) की पीठ ने श्रीमती जमुना और दो अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया।
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