लखनऊ: 23 साल पुराने कस्टडी में हत्या के मामले में पुलिसकर्मियों को सजा
लखनऊ, अमृत विचार। पुलिस कस्टडी में हत्या के मामले में आरोपी बक्शी का तालाब थाने के तत्कालीन सिपाही गुलाब चन्द्र, अनिल कुमार मिश्र, नरेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल राम प्रसाद प्रेमी, उदय नारायण, सिपाही राम प्रभाव शुक्ला, अवध नाथ चौहान और मुल्लूराम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष न्यायाधीश सोमप्रभा ने दोषी करार दिया। मामले के अन्य आरोपी अरशद अली और अब्दुल रहमान की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी।
कोर्ट ने सिपाही गुलाब चंद्र, राम प्रभाव शुक्ला और अवध नाथ चौहान को आजीवन कारावास तथा 29 हजार रुपये जुर्माना वहीं हेड कांस्टेबल राम प्रसाद प्रेमी, उदय नारायण, सिपाही अनिल कुमार मिश्र, नरेंद्र सिंह और मुल्लू राम को पांच-पांच साल की कैद और दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया। कोर्ट में सरकारी वकील नवीन त्रिपाठी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट वादी विशंभर सिंह ने 24 अगस्त 2000 को बीकेटी थाने में दर्ज कराई थी। कहा गया था कि 23 अगस्त को आरोपी सिपाही राम प्रभाव शुक्ला, अवध नाथ चौहान, चन्द्र किरण राठौर और गुलाब चंद्र रामपुर बेहटा निवासी बाबू पासी के साथ आए और एक मुकदमे की जानकारी देते हुए वादी के छोटे भाई वीरेंद्र सिंह को अपने साथ ले गए और उसे आरोपी राम प्रभाव शुक्ला के सरकारी आवास पर रखा तथा आरोपियों ने वीरेंद्र को बुरी तरह से मार पीटा। कहा गया कि आरोपी राम प्रभाव ने वादी के भाई को छोड़ने के एवज़ में पांच हजार रुपये की मांग भी की थी।
आरोप था कि वादी ने एक हजार रुपये तुरंत दे दिए और शेष पैसे अगले दिन देने का वादा किया। अगले दिन जब वादी शेष पैसे देने के लिए गया तो उसे पता चला कि उसके भाई की लॉकअप में मृत्यु हो गई। थाने पर उसे बताया गया कि मृतक ने आत्महत्या कर ली। वहीं मृतक के भाई ने आरोप लगाया गया कि पुलिस वालों ने वादी के भाई को हवालात के रोशनदान से लटकाकर हत्या कर दी और साजिश रचकर आत्महत्या का रूप दे दिया गया।
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