बरेली: सरकारी आदेशों को भी किया दरकिनार, रोक के बाद भी स्कूलों में लगवा रहे निजी प्रकाशकों की किताबें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

DEMO IMAGE

बरेली, अमृत विचार: निजी स्कूलों में छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के नाम पर सरकारी आदेशों को भी दरकिनार करने का सिलसिला जारी है। स्कूलों में एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की किताबों से पढ़ाई कराने का आदेश दिया गया है, लेकिन स्कूल प्रबंधन आर्थिक लाभ के लिए सभी विषयों की तमाम तरह की निजी प्रकाशकों की सहायक किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को विवश कर रहे हैं। यह महंगी किताबें अभिभावकों की जेब का बोझ बढ़ा रही हैं।

जिला विद्यालय निरीक्षक देवकी सिंह का कहना है कि एक अप्रैल ने नया शैक्षिक सत्र शुरू हो रहा है। सभी निजी स्कूलों को निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं लगवाने को लेकर चेतावनी दी जा चुकी है। एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई के लिए पर्याप्त हैं। अन्य किसी सहायक किताब के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। कई स्कूलों के खिलाफ शिकायतें मिल रही हैं, जल्द ही छापामारी कर स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

कापियां न लेने पर किताबें नहीं दे रहे
स्कूल प्रबंधन के साथ दुकानदार भी अभिभावकों को परेशान करने में पीछे नहीं हैं। डीआईओएस से एक अभिभावक ने पत्र देकर इसकी शिकायत की है। तमाम निजी स्कूलों ने किताबों पर अधिक मुनाफा देने वाले दुकानों और प्रकाशकों को तय कर रखा है। अभिभावक के पत्र के अनुसार दुकानदार कॉपियां नहीं लेने पर किताब देने से भी मना कर रहे हैं। अभिभावक ने डीआईओएस से ऐसी दुकानदारों को चिह्नित कर कार्रवाई करने की मांग की है।

35 सौ रुपये में मिला कक्षा एक की किताबों का सेट
नावल्टी चौराहे के समीप एक स्टेशनरी की दुकान पर बेटे की किताबें खरीदने पहुंचीं नीलम शंखधार ने बताया कि कक्षा एक की किताबों का सेट उन्हें 35 सौ रुपये में खरीदना पड़ा, जबकि दुकानदार ने चार हजार का बिल बनाया था। वहीं मो. फैजान ने बताया कि शहर के एक नामी स्कूल में उनकी बेटी कक्षा तीन में पढ़ती है। उसका 48 सौ रुपये में किताबों का सेट खरीदना पड़ा।

यह भी पढ़ें- बरेली: facebook पर युवती से दोस्ती...फिर गायब हो गया दो बच्चों का पिता, दर-दर भटक रही पत्नी

संबंधित समाचार