IFFCO: 24 दिन में दे रहे 5 दिन रोजगार, फिर भी भूदाता गुनाहगार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

आंवला, अमृत विचार: भाकियू (टिकैत) के नेतृत्व में भूदाता इफको में रोजगार पाने के लिए 51 दिनों से धरना दे रहे हैं। किसानों की मांग है कि उन्हें माह में 24 दिन योग्यता के अनुसार रोजगार मिले। तत्कालीन एसडीएम गोविंद मौर्य ने इस मामले में इफको प्रबंधन को पत्र जारी कर कई जानकारियां मांगी थी, साथ ही भूदाताओं को रोजगार देने के निर्देश दिए थे। इफको अधिकारी ने एसडीएम को भेजे पत्र में भूदाताओं पर वादा खिलाफी का आरोप लगाकर धरना विधि विरूद्ध बताया है।

इफको उप महाप्रबंधक की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि एक फरवरी 2023 को एसडीएम की अध्यक्षता में हुए समझाैते के अनुसार दैनिक वेतन भोगी आकस्मिक श्रमिकों के वेतन वृद्धि भूदाताओं या आश्रितों के संबंध में जो रोजगार से वंचित रह गए हैं, उनको संविदाकारों के माध्यम से नियोजन किया जाएगा। 

अंतिम बार मानवीय आधार पर विवाद को खत्म करने के लिए सहमति बनी थी, लेकिन एक बार में 275 भूदाता आश्रितों का नियोजन नहीं हो सका। एक दिसबंर 2023 की बैठक में एसडीएम ने 275 की सूची में पात्र भूदाताओं को चरणबद्ध तरीके से संविदाकारों के माध्यम से रोजगार देने का सुझाव दिया गया था। समझौते के बावजूद स्थायी नौकरी की मांग उठाना उचित नहीं है। 

समझौते में भूदाताओं को इफको ने आश्वस्त किया था कि उनकी सारी मांगे पूरी हो गई हैं और भविष्य में वह इससे संबंधित किसी प्रकार का धरना, प्रदर्शन शामिल नहीं होंगे । एसडीएम ने 4 जनवरी 2024 तक 50 भूदाताओं को संविदाकारों के माध्यम से नियोजित करने का सुझाव दिया। अगले 60 भुूदाताओं को 31-03-2024 तक चरणबद्ध तरीके से संविदाकारों के माध्यम से सभी पात्र भूदाता आश्रितों का नियोजन किया जा सके।

42 भूदाताओं की सूची दी गई, जिनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद 60 भूदाताओं की दूसरी सूची 12 फरवरी 2024 को एसडीएम कार्यालय में प्रस्तुत की गई। जिनको 31 मार्च से पूर्व रोजगार देने के लिए इफको प्रबंधन ने संविदाकारों को कहा गया। प्रबंधन ने आरोप लगाया कि भाकियू और उनके क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने समय- समय पर लोक निर्माण विभाग सहित अन्य अधिकारियों को भ्रमित करने वाले पत्र लिखे हैं। 

इफको प्रबंधन किसी भी जमीन पर कब्जा होने से इनकार किया गया है। वहीं भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) धरना प्रबंधक ओमशंकर सक्सेना ने बताया कि इफको के आगे प्रशासन मजबूर है। किसान चाहे जिएं अथवा मरें प्रशासन को कोई मतलब नहीं हैं। इफको ने उनकी जमीन भी ले ली, रोजगार देने के नाम पर वर्षों से किसानों और प्रशासन को भ्रमित करते आ रहे हैं। तहसील प्रशासन के अभिलेख के अनुसार इफको ने सरकारी और किसानों की जमीन पर कब्जा कर रखा है। परंतु इफको के आगे प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा हैं।

यह भी पढ़ें- बरेली: वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर पड़ेगी दोहरी, फास्टैग का केवाईसी अपडेट नहीं तो देना होगा दोगुना टोल

संबंधित समाचार