बदायूं: गन्ना खेती का सर्वे कर रकबा बढ़ाने की तैयारी, किसानों को मिलेगा नई प्रजाति का बीज

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Edited By Amrit Vichar
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बदायूं, अमृत विचार: गन्ना की फसल में रेड रोग बीमारी लगने से किसानों ने गन्ना खेती से किनारा करने का मन बना लिया है। इसलिए गन्ना खेती का रकबा दो साल में दो हजार हेक्टेयर कम हुआ है। अब गन्ना खेती का रकबा बढ़ाने को गन्ना विभाग को निर्देशित किया गया है। इसके लिए गन्ना विभाग गांव गांव गोष्ठियां करके किसानों को गन्ना खेती करने को तैयार कर रहा है।

पिछले दो साल से गन्ना में रेड रोग बीमार लग रही है। इस बीमारी से गन्ना का रंग लाल पड़ जाता है और गन्ना सूखने लगता है जिससे उस गन्ने को निकाल कर फेंक दिया जाता है। गन्ने में बीमारी लगने तथा अन्य कई समस्याओं के चलते गन्ना किसानों ने गन्ना खेती से किनारा करना शुरू कर दिया है। 

गन्ना विभाग के अभिलेखों में वर्ष 2022 में करीब 24 हजार हेक्टेयर रकबा में गन्ना खेती होती थी। उसके बाद 2023 में करीब 22 हजार हेक्टेयर रकबा में गन्ना खेती हुई। गन्ना खेती का रकबा कम होने से विभाग भी चिंतित है इस बार फिर 24 हजार हेक्टेयर में गन्ना की खेती कराने की तैयारी की जा रही है।

इसलिए अब विभाग ने किसानों के बीच गोष्ठियां करनी शुरू कर दी है। गांव गांव किसानों को गन्ना खेती से होने वाले फायदे के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही किसी तरह की दिक्कत होने पर गन्ना विभाग से संपर्क करने का आश्वासन दिया जा रहा है। जिले में इस साल गन्ना कम होने के कारण चीनी मिलें समय से पहले ही बंद हो गयीं।

गन्ना किसानों को शोध किया हुआ गन्ना बोने की सलाह दी जा रही है। गन्ना शोध केंद्र शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर अब नई प्रजाति का गन्ना लगाने को कहा जा रहा है। किसानों को गन्ने का शोध किया हुआ बीज मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए किसानों को गोष्ठियों में जानकारी दी जा रही है।

ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि पिछले साल गन्ने में रेड रोग की बीमारी लगने से किसानों को गन्ने का पूरा लाभ नहीं मिला। हालांकि कुछ समय बाद बीमारी पर नियंत्रण कर लिया गया। बीमारी के कारण गन्ना सूख गया। कई किसानों ने खराब गन्ना निकल कर फेंक दिया फिर भी खेतों में गन्ना खराब होता रहा।

इस साल कार्यवाहक जिला गन्ना अधिकारी ने गन्ना खेती का रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं जिस पर काम चल रहा है। फिलहाल गन्ना खेती का सर्वे किया जा रहा है। जिन इलाकों में गन्ना अधिक किया जाता है उन क्षेत्रों में चीनी मिलों के अधिकारी भी किसानों से बात कर रहे हैं।

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