मुरादाबाद: पुलिस लाइन में फालोवर ने फांसी लगाकर की खुदकुशी
मुरादाबाद,अमृत विचार। पुलिस लाइन में तैनात हेड फालोवर ने ड्यूटी के दौरान अंगोछे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। कमरे में पहुंचे साथियों की जब नजर पड़ी तो उनकी चीख निकल गई। सूचना पर आईजी व एसएसपी मौके पर आ गए। फारेंसिक टीम को भी बुला लिया गया। मौके पर मिले सुसाइड नोट पर बीमारी …
मुरादाबाद,अमृत विचार। पुलिस लाइन में तैनात हेड फालोवर ने ड्यूटी के दौरान अंगोछे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। कमरे में पहुंचे साथियों की जब नजर पड़ी तो उनकी चीख निकल गई। सूचना पर आईजी व एसएसपी मौके पर आ गए। फारेंसिक टीम को भी बुला लिया गया। मौके पर मिले सुसाइड नोट पर बीमारी से तंग होकर फांसी लगाने का हवाला दिया है। जबकि पत्नी आरआई पर मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगा रही है। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मूलत: उत्तराखंड के चमौली जिले के ग्राम घनसौला निवासी चंदर सिंह विष्ट पुलिस लाइन में फालोवर थे। करीब सात साल से वह हेड फालोवर के पद पर तैनात थे। उनकी ड्यूटी पुलिस लाइन में चल रही थी। वह यहां पर पत्नी रूपा विष्ट के साथ रहते थे। उनके दो बच्चे अमित और अंजलि देहरादून के करनपुर में कोचिंग कर रहे हैं। पता चला कि दोपहर तीन बजे वह खाना खाने के लिए घर गया। करीब आधे घंटे बाद वह वापस ड्यूटी पर आ गया।
इस दौरान उसके साथ वाले कर्मचारी अमरदीप, मोहनराणा और विजय किसी काम से बाहर चले गए। उनके जाने के बाद चंदर ने दोनों कमरों के दरवाजे बंद कर लिए और अंदर जाकर अंगोछे से फांसी लगा ली। करीब साढ़े चार बजे फालोवर विजय मौके पर आया तो शव लटकता देख भागकर उसने इसकी सूचना आला अफसरों को दी। कुछ देर में ही आईजी रमित शर्मा, एसएसपी प्रभाकर चौधरी मौके पर आ गए। वहीं रूपा को इसकी जानकारी हुई तो वह बेसुध हो गई।
रोते हुए वह भी मौके पर आ गई। यहां पर उसने अफसरों के सामने आरआई पर मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। हालांकि मौका-मुआयना करने के बाद एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें लिखा था कि वह बीमारियों से तंग आ चुका हूं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
.रो-रोकर पत्नी बोली, न जाते ड्यूटी, लिख जाने देते रपट
फालोवर चंदर द्वारा आत्महत्या करने की सूचना मिलने के बाद पत्नी रूपा बेसुध हो गई। रोते हुए वह लगातार आरआई पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगा रही थी। उसका कहना था कि रविवार को जब ड्यूटी से आए थे तो कह रहे थे कि आरआई ने काफी परेशान कर दिया है। अगर उसे कुछ हो जाता है तो उसका जिम्मेदार आरआई होगा। रूपा की मानें तो मानिसक रूप से परेशान होने के कारण उसने कहा कि ड्यूटी पर मत जाओ लेकिन रपट लिखने के डर से वह चले गए। रो-रोकर रूपा बार-बार यही बात कह रहे थे कि इससे अच्छा होता की रपट लिख जाती लेकिन इनकी जान तो बच जाती।
घटनास्थल पर पहुंची रूपा ने बताया कि खाना खाने के लिए भी पांच मिनट का वक्त नहीं होता था। उत्पीड़न के कारण कई दफा रिटायरमेंट लेने की बात कह चुके थे। हालांकि मैं बच्चों की पढ़ाई का हवाला देकर कुछ साल और नौकरी करने की बात कहकर समझा देती। रविवार की दोपहर भी वह काफी तनाव में थे। हालांकि अफसर इन आरोपों को निराधार बताते हुए जांच कराने की बात कह रहे हैं। एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि मौके से मिले सुसाइड नोट पर साफ लिखा है कि रोज-रोज की बीमारियों से तंग आकर आत्महत्या कर रहा हूं। उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षर से सुसाइड नोट की लेखनी भी हूबहू मिल रही है।
वहीं ड्यूटी को लेकर मानसिक उत्पीड़न की बात पर एसएसपी का कहना है कि करीब सात साल से चंदर यहां पर हेड फालोवर के रूप में तैनात थे। उनके पास दूसरे फालोवर की ड्यूटी लगाने की जिम्मेदारी थी, लिहाजा यह आरोप समझ से परे हैं। इसके बाद भी परिजनों के आरोपों की जांच कराई जाएगी। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों से कहना कि पापा बीमार हैं
मुरादाबाद। चंदर की मौत के बाद पत्नी रूपा का रो-रोकर बुरा हाल था तो वहीं पुलिस कर्मी भी दुविधा में थे। उनके समझ में नहीं आ रहा था कि देहरादून के करनपुर में पढ़ाई कर रहे दोनों बच्चे अमित और अंजलि को कैसे घटना की जानकारी दी जाए। कुछ साथी पुलिस कर्मियों की पत्नी ने रूपा को समझाया तो वह बिफर गई। बोली किस मुंह से बच्चों से कहूं की तुम्हारे पापा अब जिंदा नहीं हैं। आखिरकार निर्णय लिया गया कि दो पुलिस कर्मियों को देहरादून भेजकर बच्चों को बुलाया जाए। जब पुलिस कर्मी जाने की तैयारी करने लगे तो रूपा ने कहा कि उनसे कहना कि पापा बीमार है, घर बुला रहे हैं।
