लोकसभा चुनाव 2024: राजनीतिक दलों की उधेड़ बुन में इधर-उधर खिसक रहा वोट बैंक

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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कासगंज, अमृत विचार। राजनीतिक दलों की उधेड़ बुन में एक ऐसा भूचाल आया है कि वोट बैंक इधर से उधर खिसक रहा है। दलीय निष्ठा रखने वाले दिग्गज नेता अब दूसरे दलों में निष्ठा जता रहे हैं। सपा के हाथों से यादव वोट बैंक खिसकता आ रहा है तो भाजपा का लोधी वोट बैंक भी दूसरे दल की ओर रूझान कर रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है किए दूसरे के दल में निष्ठा जता रहे दूसरे दलों के नेताओं को एक दूसरे के चेहरे पसंद नहीं आ रहे।

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान का शोर तेजी से है। एटा-लोकसभा क्षेत्र में सपा-भाजपा की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है। जातिगत समीकरणों से सपा ने जीत के लिए जो जाल बना था उसमें कहीं न कहीं खुद उलझती नजर आ रही है। टिकट देने में यादव दावेदार को दरकिनार कर रहे पार्टी ने देवेश शाक्य को चुनाव मैदान में उतारा है। 

उनके जरिए शाक्य समाज को साधने की कोशिश है, लेकिन प्रयास के बीच पार्टी का बेस वोटर माने जाने वाले यादव खिसकते नजर आ रहे हैं। बता दें कि इस सीट पर पूर्व में सदैव ही सपा ने यादव को ही प्रत्याशी बनाया है। अब यदि यादवों को संभाला तो सियासी गणित और भी गड़बड़ा सकता है। 

बीते ही दिनों सपा के दिग्गज पूर्व सांसद देवेंद्र यादव, एटा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख बजीर सिंह यादव कासगंज में किलौनी के प्रधान शेखर यादव सपा छोड़कर भाजपा में आस्था जताई है। वहीं सपा नेता जो अब तक मुलायम सिंह यादव अमर रहे के नारे लगा रहे थे वे योगी, मोदी जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। 

अब बात भाजपा की करें तो भाजपा एटा से अधिक कासगंज जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों पर जोर लगाए हुए है। क्योंकि एटा लोकसभा क्षेत्र के सदर एटा और मारहरा लोधी बाहुल्य है। यहां भाजपा को जीत सुनिश्चित दिखाई दे रही है। जबकि कासगंज की विधानसभा क्षेत्रों में शाक्य समाज का दबदबा है। इसलिए यहां हर पहलू पर शाक्य को साधने की कोशिश की जा रही है। 

पिछले दिनों जब केंद्रीय गृहमंत्री कासगंज आए तो उन्होंने शाक्य समाज को साधने के लिए महादीपक शाक्य का नाम लेकर उन्हें भाजपा का कर्णधार बताया था। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी से जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय नेतराम सिंह के पुत्र प्रवेंद्र सिंह राणा एवं जिला पंचायत सदस्य कमल सिंह टैनी कुछ दिन पहले ही सपा में आस्था जता चुके हैं। बदलती दलीय निष्ठा राजनैतिक समीकरण को बिगाड़े हुए है।

अनुमानित जातिगत आंकड़े
-लोधी 2 लाख 80 हजार
-शाक्य 02 लाख 10 हजार
-यादव 2 लाख 40 हजार 
-मुस्लिम 1 लाख 50 हजार
-ठाकुर 1 लाख 80 हजार
-जाटव 1 लाख 80 हजार 
-ब्राह्मण 95 हजार 
-वैश्य 95 हजार 
-बघेल 70 हजार 
-अन्य 01 लाख 96

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