बरेली: माफिया ने सस्ते में धान खरीदने का फैलाया बड़ा नेटवर्क

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली,अमृत विचार। अन्नदाताओं से ठगी के मामले में भुता समेत तीन राइस मिलों पर शासन ने जांच बैठा दी है। मगर, सरकारी धान खरीद में माफियाओं का नेटवर्क पूरी तरह हावी हो चुका है। जिस धान को नमी बातकर लौटाया जा रहा है। वही धान किसानों से आढ़तिये 1200 रुपये क्विंटल तक में खरीद रहे …

बरेली,अमृत विचार। अन्नदाताओं से ठगी के मामले में भुता समेत तीन राइस मिलों पर शासन ने जांच बैठा दी है। मगर, सरकारी धान खरीद में माफियाओं का नेटवर्क पूरी तरह हावी हो चुका है। जिस धान को नमी बातकर लौटाया जा रहा है। वही धान किसानों से आढ़तिये 1200 रुपये क्विंटल तक में खरीद रहे हैं।

किसानों से औने-पौने दामों पर धान की सीधी खरीद राईस मिलों पर भी होती है। कई जगह तो धान सुखाने को किसानों को मंडी में रात बितानी पड़ रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि हर साल की तरह इस साल भी राइस मिलर्स, आढ़ती और खाद्य विभाग के अफसरों की सांठगांठ से माफियाओं ने बड़ा नेटवर्क फैलाकर करोड़ों के वारे-न्यारे की योजना बना रखी हो। इनता ही नहीं मझोले किसानों की खतौनी, आधार कार्ड, चेक जमा कराकर माफिया बाद में उस खरीद को सरकारी केंद्रों पर दर्शाते हैं।

जिले में एक अक्टूबर से शुरू हुई धान खरीद के लिए छह एजेंसियों के 73 क्रय केंद्र खोले गए हैं। शासन व जिला प्रशासन इस बार धान खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्ती करने का दावा कर रहा है, लेकिन उनके समक्ष धान खरीद के खेल को पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। खाद्य विभाग के अलावा तहसीलों से जुड़े अफसरों की सांठगांठ से सरकारी धान खरीद में माफिया, बिचौलिए और राइस मिलर्स का गठजोड़ पूरी तरह हावी है।

ग्रामीण इलाकों में धान की खरीद न के बराबर हो रही है, क्योंकि वहां धान में नमी अधिक होने की बात कहकर किसानों को लौटा दिया जाता है। वहीं, किसान आढ़त पर अपना धान 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक के हिसाब से सीधे राईस मिल में तुलवा देता है। उसी किसान के अभिलेख क्रय केंद्रों पर भेजकर उसे सरकारी खरीद में दर्शाया जाता है। इस काम में केंद्र प्रभारियों को पुरानी महारथ हासिल है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि केंद्रों पर धान खरीदे जाने के लिए जिला प्रशासन गंभीर है।

सुखाने और छलना लगाने पर हो रही खरीद
शासन व प्रशासन किसानों को सहूलियत देने का दावा कर रहा है, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचना किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं। यहां किसानों को ज्यादा नमी समेत अन्य मानकों के नाम पर धान बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई दिन तक सुखाने और छलना लगाने के बाद बमुश्किल उनकी धान की तौल हो पा रही है। प्रतिदिन तीन सौ क्विंटल धान खरीद की बाध्यता से भी किसान परेशान हैं। अधिकांश खरीद केंद्रों पर एक कांटा लगा है। उस पर भी राइस मिलर्स के कर्मचारी रहते हैं।

उठाना पड़ रहा घाटा, मुश्किल में अन्नदाता
कोरोना काल में तमाम तरीके की समस्याओं के बीच किसान बड़ी उम्मीद के साथ मंडी में धान लेकर पहुंचता है, लेकिन समर्थन मूल्य नहीं मिलने से उसको सिर्फ निराशा हाथ लग रही। हालात ये हैं कि मजबूरन उसे धान इतना सस्ता बेचना पड़ रहा कि प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये तक का घाटा झेल रहा है। तमाम खर्च और धान से होने वाली आमदन को जोड़कर देखा गया तो किसान के हिस्से केवल नुकसान ही आ रहा है। यह स्थिति जिले के केवल एक किसान की नहीं बल्कि ज्यादातर की है। ज्यादा खराब स्थिति उन किसानों की है जिन्होंने जमीन ठेके पर ले रखी है।

संबंधित समाचार