बरेली: जिला महिला अस्पताल में चिकित्सक अनुपस्थित, परेशान रहे मरीज
बरेली, अमृत विचार। जिला महिला अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बाद भी जरूरी नहीं है कि डॉक्टर आप को देख लें। ऐसी हालात में या तो मरीज को लंबा इंतजार करना पड़ता है। या फिर वह मायूस होकर घर लौट जाता है। यह सब अस्पताल में …
बरेली, अमृत विचार। जिला महिला अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बाद भी जरूरी नहीं है कि डॉक्टर आप को देख लें। ऐसी हालात में या तो मरीज को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
या फिर वह मायूस होकर घर लौट जाता है। यह सब अस्पताल में इलाज के लिए भटक रहे मरीजों ने बताया। वहीं, शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में भी ओपीडी के दौरान घंटो चिकित्सक गायब रहे। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्टाफ के हो तो क्या, हम नहीं देखेंगे
जिला अस्पताल में कार्यरत एक वार्ड व्बाय अपनी पत्नी को दिखाने के लिए जब जिला महिला अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सक ने उसकी पत्नी को देखने से इनकार कर दिया। वार्ड ब्वाय की पत्नी मीना ने बताया कि पर्चा तो देखना दूर, ठीक से बात तक नहीं करते। उसके पति ने डाक्टर से कहा कि वह स्टाफ है। लेकिन चिकित्सक ने खाली बैठने के बाद भी उन्हें नही देखा।
चिकित्सक गायब प्रशिक्षु लिख रहे दवाएं
जिला महिला अस्पताल में ओपीडी के दौरान करीब एक बजे तक डा. शशि गौतम, डा. स्वाति अग्रवाल अपने कमरे से नदारद दिखीं। दोनों ही चिकित्सक के कमरे के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। सिर्फ डा. नीलू और डा. किरन वाला मरीजों को देख रही थीं। हैरत की बात तो यह है कि अस्पताल में प्रशिक्षु डाक्टर की सीट पर बैठ कर मरीजों को दवाई लिख रहे थे।
दिव्यांग मरीज पर तो तरस खाओ साहब
शासन से लेकर प्रशासन तक हर कोई दिव्यांगों के लिए तमाम प्रकार की योजनाएं चला रहे हैं। लेकिन जिला महिला अस्पताल में दिव्यांगों को इलाज के नाम पर घंटो इंतजार कराया जा रहा है। चिकित्सकों के कमरे के बाहर व्हीलचेयर पर दिव्यांग मरीज घंटो इंतजार करती रही। लेकिन उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका।
“एक डाक्टर मेडिको लीगल कर रही थी तो दूसरी डाक्टर को किसी काम के लिए बोला गया था। बाद में दोनों ही डॉक्टर आ गई थी। प्रशिक्षु को मरीजों बस सुझाव देने के आदेश हैं। अगर उन्होने किसी मरीज को दवाएं लिखी तो उनसे स्पष्टीकरण जाएगा।”–डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस
