संपत्ति विवाद का निस्तारण आपराधिक न्यायालय में संभव नहीं :हाईकोर्ट 

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक संपत्तियों को लेकर उपजे विवाद में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत वाराणसी के राजघराने को कोई राहत ना देते हुए कहा कि ऐसे विवाद को सिविल न्यायालय द्वारा ही निस्तारित किया जा सकता है। आपराधिक न्यायालय द्वारा ऐसे मामलों का निस्तारण नहीं किया जा सकता है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की एकलपीठ ने बनारस के राजा विभूति नारायण सिंह की बेटी और बेटे के बीच संपत्ति विवाद को लेकर दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए की। वर्तमान याचिका बनारस के राजा की बेटी महाराज कुमारी विष्णु प्रिया की ओर से दाखिल की गई थी। 

कोर्ट ने आगे कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वह सिविल न्यायालय में अंतरिम राहत के लिए एक आवेदन दाखिल कर सकती हैं और सिविल न्यायालय को उनकी अर्जी पर 4 महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। हालांकि कोर्ट ने अपने इस आदेश के साथ ही संपत्ति के किसी भी स्थानांतरण पर रोक लगा दिया है। दरअसल राजकुमारी का छोटा भाई विवादित संपत्ति को बेच रहा है और याची ने इस पर रोक लगाने की मांग लेकर याचिका दाखिल की है, क्योंकि इससे उनका हित प्रभावित हो रहा है। 

हालांकि विपक्षी/भाई ने कोर्ट को बताया कि सक्षम न्यायालय द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पहले ही अंतरिम आदेश पारित किया जा चुका है। राजस्व रिकॉर्ड में संपत्ति उनके नाम दर्ज है। लिहाजा याची की ओर से उसे किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकता है। इसके अलावा याची और विपक्षी के बीच संपत्तियों का स्पष्ट विभाजन है, फिर भी याची विपक्षी को उनके हिस्से की संपत्ति बेचने से रोक रही हैं।

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