Kanpur: स्कूलों की मनमानी: बच्चों की आर्थिक स्थिति जांचने घर जा रहे निजी स्कूल, अधिकार न होने पर भी कराया भौतिक सत्यापन

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। दाखिले से बचने के लिए निजी स्कूलों के प्रतिनिधि बच्चों के घरों तक पहुंच गए। प्रवेश खारिज कराने के लिए उन लोगों ने आर्थिक स्थिति तक का सर्वे कर दिया था। सर्वे के दौरान स्कूलों के प्रतिनिधियों ने मोटरसाइकिल, टीवी व फ्रिज तक की जानकारी हासिल की थी। शिक्षा विभाग की पूर्व में हुई समीक्षा के दौरान निजी स्कूलों के इस कारनामे का खुलासा हुआ। शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस कार्य के लिए निजी स्कूलों को नोटिस जारी की गई है। उनकी ओर से इस तरह का कार्य करना गैरकानूनी है। 

शहर में निजी स्कूल आरटीई के तहत प्रवेश न लेने के लिए हर दांवपेंच अपना रहे हैं। इसके लिए वे सूची में शामिल बच्चों के घर तक पहुंचने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से हुई समीक्षा के दौरान जब इस बाबत सूचना हुई तो अधिकारियों की ओर से इस प्रकरण को प्रशासन के संज्ञान में भी लाया गया। अब यह निर्देश जारी हुआ कि निजी स्कूल इस तरह की हरकत को दोबारा नहीं करेंगे। 

यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि आरटीई के तहत पहले ही बच्चों का सत्यापन हो चुका है। इसके बाद किसी भी तरह का सत्यापन गलत है। निजी स्कूलों को किसी तरह से आरटीई के तहत सत्यापन का अधिकार ही नहीं है। 

यह स्कूल पहुंचे घर तक

डॉ वीरेंद्र स्वरूप एजूकेशन सेंटर श्याम नगर, डॉ वीरेंद्र स्वरूप पब्लिक स्कूल कैंट, डॉ वीरेंद्र स्वरूप पब्लिक स्कूल, गोविन्द नगर, डॉ वीरेंद्र स्वरूप पब्लिक स्कूल, सिविल लाइंस, एनएलके पब्लिक स्कूल लिटिल स्टेप अशोक नगर, एनएलके वेंडी पब्लिक स्कूल, खलासी लाइन, एनएलके पब्लिक विष्णुपुरी, वेंडी हाईस्कूल नारामऊ कल्याणपुर, दिल्ली पब्लिक स्कूल कल्यानपुर, दिल्ली पब्लिक स्कूल किदवई नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल बर्रा, दिल्ली पब्लिक स्कूल सर्वोदय नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल आजाद नगर, सेठ आनन्दराम जयपुरिया स्कूल, कैंट, युनाइटेड पब्लिक स्कूल सिविल लाइन।  

वार्ड की भी जांच

निजी स्कूलों की ओर से भौतिक सत्यापन करते हुए वार्ड की जांच भी की जा रही है। वार्ड की जांच इसलिए की जा रही है कि यदि बच्चे का घर वार्ड के बाहर होता है तो स्कूल उसके प्रवेश पर रोक लगा सकता है। इसलिए कुछ स्कूलों के प्रतिनिधियों की ओर से क्षेत्र के पार्षदों से भी संपर्क किया गया था। 

नहीं मिला कोई बहाना

स्कूलों की ओर से की गई इस जांच के बाद भी उन्हें किसी तरह का कोई बहाना नहीं मिला। इसके बाद स्कूलों की ओर से अभिभावकों को अभिलेखों की कमी का बहाना बनाकर टरकाया गया। यही वजह है कि तीन सूची जारी होने के बाद भी शहर के निजी स्कूलों की ओर से सिर्फ बीस फीसदी ही प्रवेश लिए गए। पूर्व में हुई जांच में यह सामने आया कि 19 ऐसे स्कूल सामने आए थे जिन्होंने एक भी प्रवेश नहीं लिया था।

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