Kanpur: डॉक्टरों ने 41 फाइब्रॉइड निकालकर महिला की बचाई जान, शरीर में खून की कमी के साथ हो गई थी बांझपन की समस्या

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। एक साल से गर्भाशय में फाइब्रॉइड की समस्या लेकर इलाज के लिए दर-दर भटक रही महिला को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में संजीवनी मिली। जांच कराने पर महिला के गर्भाशय में कई फाइब्रॉइड की पुष्टि हुई। विभागाध्यक्ष डॉ.नीना गुप्ता ने टीम के साथ ऑपरेशन कर न सिर्फ महिला की जान बचाई बल्कि उसकी बच्चेदानी भी सुरक्षित बचा ली।

यशोदा नगर निवासी 24 वर्षीय महिला मल्टीपल फाइब्रॉइड की समस्या से करीब एक साल से पीड़ित थी, जिस कारण महिला के पेट में तेज दर्द और भारी मासिक रक्तस्राव हो रहा था। महिला को शरीर में खून की काफी कमी होने के साथ ही बांझपन की समस्या से भी जूझना पड़ रहा था। बीमारी के कारण महिला की दिनचर्या और जीवनशैली भी प्रभावित हो गई थी। परिजन के मुताबिक उन्होंने कई अस्पतालों में महिला का इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। एक डॉक्टर ने तो बच्चेदानी निकालने तक की भी बात बोल दी थी। 

करीब 15 दिन पहले परिजन बीमार महिला को लेकर हैलट अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति विभाग लेकर पहुंचे। यहां पर स्त्री एवं प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.नीना गुप्ता ने महिला को ओपीडी में देखने के साथ ही उसकी पूरी केस हिस्ट्री की जानकारी ली। छह दिन पहले डॉ.रश्मि यादव, डॉ.दीप्ति, डॉ.अंजलि समेत टीम के साथ मिलकर महिला को फाइब्रॉइड के लिए मायोमेक्टमी किया गया। करीब डेढ़ घंटे चले ऑपरेशन के दौरान छोटे व बड़े 41 फाइब्रॉइड निकाले। 

विभागाध्यक्ष डॉ.नीना गुप्ता ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी उच्च जोखिम का था। ऑपरेशन के दौरान ज्यादा रक्तस्त्राव होने से हाइस्टेरेक्टमी का भी  खतरा था। सुविधापूर्वक व कठिनाइयों को पार करते हुए महिला की जान बचाई गई है। साथ ही उसकी बच्चेदानी भी नहीं निकाली पड़ी। मायोमेक्टोमी गर्भाशय फाइब्रॉइड को हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी है। मायोमेक्टोमी गर्भाशय को बरकरार रखती है। इसलिए प्रक्रिया के बाद भी महिला गर्भवती हो सकती है।

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