बरेली: कोर्ट ने इंस्पेक्टर प्रेमनगर, सीओ और एसआई को किया जवाब तलब
जानलेवा हमले के मामले में कोर्ट में गलत अर्जी देकर फंसी पुलिस
बरेली, अमृत विचार। जानलेवा हमले के मामले मे हाईकोर्ट के आदेश पर एसीजेएम कोर्ट ने इंस्पेक्टर प्रेमनगर को अतिरिक्त विवेचना का आदेश दिया, लेकिन पुलिस ने इसके लिए अदालत में ही केस डायरी दिलाने की अर्जी दे दी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने इस पर इंस्पेक्टर प्रेमनगर सीओ और एसआई को नोटिस भेजकर 4 और 5 जून को स्पष्टीकरण तलब किया है।
थाना प्रेमनगर में मनमोहन के विरुद्ध दर्ज जानलेवा हमले और धमकी देने के केस में हाईकोर्ट ने अतिरिक्त विवेचना का आदेश दिया था। इस पर एसीजेएम-2 ने 10 मई को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत इंस्पेक्टर प्रेमनगर को इसका पालन करने का आदेश दिया था। इस पर एसआई संजीव कुमार ने केस डायरी दिलाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट ने पाया कि लोअर कोर्ट ने थानाध्यक्ष को अतिरिक्त विवेचना का आदेश दिया था। एसआई ने कोर्ट में यह झूठ भी कहा कि उन्हें विवेचना इंस्पेक्टर प्रेमनगर आशुतोष रघुवंशी ने दी है लेकिन कोई अभियोजन प्रपत्र पेश नही किया।
कोर्ट ने नोटिस में कहा है कि सीआरपीसी में कहीं भी पुनर्विवेचना की व्यवस्था नही है। अतिरिक्त विवेचना का प्रावधान है। ऐसा लगता है कि इंस्पेक्टर आशुतोष रघुवंशी ने हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट के आदेश को हल्के मे लिया है। नियमानुसार प्रभारी निरीक्षक को ही अतिरिक्त विवेचना का अधिकार है, एसआई को नहीं। नोटिस में अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार ने 2009 मे सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट लागू किया था। अगर इंस्पेक्टर अतिरिक्त विवेचना करना चाहते तो केस डायरी की प्रतियां कंप्यूटर से निकलवा सकते थे। लेकिन खानापूरी के लिए कोर्ट में अर्जी दी है जिससे उसका कीमती समय बर्बाद हुआ।
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