प्रयागराज : दो राजनैतिक घरानों में छिड़ी कुर्सी की जंग, किसके सिर होगा ताज़

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Edited By Amrit Vichar
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एक डिप्टी सीएम, एक मंत्री व 7 विधायकों की साख दांव पर

अमृत विचार,  प्रयागराज। भारत को प्रधानमंत्री देने वाली इस इलाहाबाद संसदीय सीट पर हुआ चुनाव काफी दिलचस्प रहा है। इस लोकसभा चुनाव में मतदाता विकास, राष्ट्रवाद, कानून-व्यवस्था के मुद्दों को मत किया गया। इस चुनाव में जातिवाद ने कड़ी टक्कर दी है। दो राजनैतिक घरानों में छिड़ी कुर्सी की इस जंग में 4 जून को मतगणना के बाद किसके सिर ताज़ होगा यह अभी कह पाना मुश्किल है।  लोकसभा चुनाव के छठवें चरण का मतदान शनिवार 25 मई को कड़ी सुरक्षा में संपन्न हो गया है। 

पांच विधानसभा सीटों वाले इस संसदीय क्षेत्र में इस बार मतदाताओ ने काफी सोच समझ कर मतदान किया है। मतदाताओं ने विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर ही वोटिंग की है। इस बार लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण भारी रहा है। वहीं, लोकसभा चुनाव में मतदाताओं में वोटिंग के प्रति कम रुचि दिखाई देना बीजेपी के लिए खतरे का सबब बना दिखाई दिया है। इलाहाबाद सीट प्रदेश की सबसे हॉट सीट मानी जा रही है। जहां दो नेताओं में एक  दिवंगत केसरीनाथ त्रिपाठी के पुत्र नीरज त्रिपाठी तो दूसरे कुँवर रेवती रमण सिंह के पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह के बींच कड़ा मुकाबला रहा है।  लेकिन इसके बावजूद भी वोटिंग पिछले चुनाव के मुकाबले कम मतदान हुआ।

वोटिंग में आई इस कमी को कुछ चुनावी महारथी बीजेपी के लिए बेहतर नहीं समझ रहे हैं। पिछले चुनाव के मतदान प्रतिशत की बात करें तो जब-जब मतदान का प्रतिशत कम रहा है, तब बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बजी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार हाट इलाहाबाद संसदीय सीट पर बीजेपी की मजबूती कम दिखी। पोलिंग बूथ 51 मतदाताओं का घर से न निकलना क्या संदेश दे रहा है। 2014 और 2019 के वोटिंग प्रतिशत की तुलना 2024 के चुनाव से करें तो 2019 में इस सीट पर लगभग दो हजार कम मतदान हुआ था। फिर भी भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी ने विजय हासिल करते हुए परचम लहराया था।

 प्रयागराज में प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अमित शाह की लगातार रैली के बावजूद यह कयास लगाया गया था कि इस बार चुनाव का प्रतिशत 60 के ऊपर होगा। इस चुनाव में कम मतदान कम हुआ। पिछले चुनावों से तुलना में इस बार लोगो में उत्साह कम देखने को मिला है।  चुनावी विश्लेषक भी इस बार मतदान का प्रतिशत कम होने की वजह का कई कारण बता रहे हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता बीते दो चुनाव के लहर जैसे ही इस बार भी बीजेपी की ही जीत को मान रहे थे। इस वजह से वो मतदान में उत्साह कम रहा। इसके साथ ही इस बार मतदाता धर्म के आधार पर भी वोट डालने को तैयार नही हुआ। विश्लेषक यह मान रहे हैं कि इस बार भी चुनावों में बीजेपी की इलाहाबाद सीट पर जीत आसान नही है।

2019 में 54% हुआ था मतदान

 2019 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट में कुल 53.4 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में 51.75 फीसदी ही मतदान हुआ है। इस बार महंगाई, बेरोजगारी थे साथ जातीय समीकरण को लेकर बूथों पर मतदाता अपना वोट किये है।   मोदी के नाम पर इलाहाबाद में भाजपा के लिए जीत हांसिल करना  आसान नहीं है।  

दो दिग्गज नेताओं के बेटों में बड़ी कड़ी टक्कर

इलाहाबाद सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता रहे पं. केशरीनाथ त्रिपाठी के बेटे नीरज त्रिपाठी और कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे सपा नेता रेवती रमण सिंह के पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह के बीच कड़ी चुनौती रही है। वहीं बसपा से रमेश पटेल मैदान में थे। 

कड़ी सुरक्षा में होगी मतगणना

मतगणना को लेकर प्रयागराज कमीश्नर रमित शर्मा और जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने कड़ा बंदोबस्त किया है। मुंडेरा मंडी में 11000 सिपाहियो को तैनात किया गया है साथ ही पैरामिलिट्री फोर्स आर ए एफ, के साथ आरएएफ के जवान भी लगाए गये है जिससे किसी प्रकार का कोई बवाल न हो सके। उपद्रव या बवाल करने वालो के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

 

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