मुरादाबाद: हेलो! पुलिस को देते हैं महीना, धड़ल्ले से चल रहा है स्पा सेंटर

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मुरादाबाद,अमृत विचार। शहर में स्पा सेंटर चलाने में बड़ा खेल हो रहा है। इस खेल में जहां एक-दूसरे का सेंटर बंद करने की साजिश रची जाती है तो वहीं पुलिस और तथाकथित मीडिया कर्मियों के पास उनका हिस्सा पहुंचाया जाता है। बाकायदा तय है कि हर माह चौकी और थाने से लेकर मीडिया कर्मियों के …

मुरादाबाद,अमृत विचार। शहर में स्पा सेंटर चलाने में बड़ा खेल हो रहा है। इस खेल में जहां एक-दूसरे का सेंटर बंद करने की साजिश रची जाती है तो वहीं पुलिस और तथाकथित मीडिया कर्मियों के पास उनका हिस्सा पहुंचाया जाता है। बाकायदा तय है कि हर माह चौकी और थाने से लेकर मीडिया कर्मियों के बीच किस तरह से रकम का बंदरबाट होता है।

इतना ही नहीं स्पा सेंटर चले या फिर बंद रहे, लेकिन इस खेल मे शामिल लोगों का महीना समय से पहुंचता है। यही वजह है कि शासन-प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद भी संचालक पुलिसिया कार्रवाई से बेफिक्र हैं। बड़े दावे से कहते हैं कि हर महीने हिस्सा जाता है, जिस कारण कार्रवाई होने से पहले ही पुलिस से उनके पास सूचना आ जाती है।

यह आरोप हम किसी पर नहीं लगा रहे हैं, इसका खुलासा खुद एक वायरल हो रहे एक आडियो से हो रहा है। जिसमें किस तरह से एक सेंटर संचालिका दूसरे स्पा सेंटर के संचालक से रकम का बंदरबाट करने और दूसरे स्पा सेंटर को बदनाम करने की साजिश का खुलासा कर रही है। करीब 17 मिनट 7 सेकेंड की इस आडियों में पूरे खेल का खुलासा होता है। इस आडियो के कुछ बातचीत से आपको अवगत कराते हैं। इस आडियो में दिल्ली रोड स्थित एक काम्पलैक्स में चल रहे स्पा सेंटर संचालिक शहर के एक अन्य स्पा सेंटर संचालक से बात कर रही है। बातचीत के दौरान कई बार वह लोग अपशब्दों का प्रयोग करने के साथ ही सेक्स रैकेट के संबंध में भी बात करते हैं।

बातचीत के कुछ अंश
संचालक–क्या चल रहा है
संचालिका—काम सहीं चल रहा है, दूसरा वाला तो बंद हो गया
संचालक- देखना कोई मुसीबत न आए
संचालिका—नहीं हम पर तो कोई मुसीबत नहीं आएगी, जब आई थी तो आधे घंटे के लिए शटर बंद कर दिया था। जबकि दो कस्टमर भी अंदर थे
संचालक–फिर भी बराबर-बराबर में हैं दोनों पर बात आएगी इस बात का ध्यान रखना।
संचालिका–ऐसा कुछ नहीं होगा, अगर ऐसी कोई बात आएगी तो पहले मुझे खबर मिल जाएगी।
संचालक- क्या पैसे जा रहे हैं तेरे
संचालिका- हां जा रहे हैं, न्यूज वाले और पुलिस वालों को, यह खबर मुझे न्यूज वालों ने तो ही भेजी है।
संचालक- न्यूज वाले को कितने जा रहे हैं महीने
संचालिका– दस हजार
संचालक- और पुलिस वालों को
संचालिका–थाने में ऐसे बीस और चौकी में दस हजार जा रहे हैं।
संचालक-कुल तीस हजार जा रहे हैं टोटल, किराया कितना है
संचालिका—किराया तीस हजार है
संचालक–एक लाख का तो खर्चा है
संचालिका– हां एक लाख का खर्चा है बिजली और अन्य मामले भी हैं बस सही काम चल रहा है
संचालक- इंट्री कितनी है
संचालिका- पंद्रह सौ से दो हजार, लेकिन जो रेगुलर कस्टमर होते हैं उनसे कम ले लेते हैं। फिर भी एक हजार से कम नहीं है इंट्री
संचालक-तुम्हारे यहां से जो क्लाइंट आते हैं उनको मैं वापस कर देता हूं
संचालिका- क्लाइंटों की तो मुंह मारने की आदत होती है। घूम फिर कर मेरे पास ही आते हैं।

यह तो आडियो की बात चीत के शुरुआती अंश है। इसके बाद संचालिक बेधड़क होकर कहती है कि कैसे उसने बराबर के स्पा सेंटर को बंद करा दिया। उस संचालक ने जिससे पंगा लिया वह लोग कितने खतरनाक है, अगर वह यहां से नहीं भागा तो उसे ऐसा सबक सिखाएंगे कि याद रखेगा। ऐसी तमाम मुद्दों पर बात करते हुए बेधड़क होकर कहती है कि मुझे कोई खतरा नहीं हैं। छापा पड़ने से पहले ही पुलिस के पास से सूचना आ जाती है। इतना ही नहीं दोनों किसके यहां पर स्पा की आड़ में गलत काम हो रहा है, इस पर चर्चा होती है। हालांकि बाद में संचालक महिला को डांटते हुए नसीहत भी देता है कि सही तरह से काम करो, ज्यादा दिन तक चल पाओगी।

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