बरेली: 700 करोड़ फंसे तो बैंकों ने लोन देने से खड़े किए हाथ

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। लाकडाउन में व्यवसाय ठप होने के कारण लोगों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसका असर बैंकों के कारोबार पर भी पड़ा है। त्योहारों के नजदीक आते ही बाजार में हलचल भले ही बढ़ गई हो। व्यापारी बाजार पूरी तरह खुलने से 50 फीसदी कारोबार बढ़ने की संभावना जता रहे हैं, …

बरेली, अमृत विचार। लाकडाउन में व्यवसाय ठप होने के कारण लोगों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसका असर बैंकों के कारोबार पर भी पड़ा है। त्योहारों के नजदीक आते ही बाजार में हलचल भले ही बढ़ गई हो। व्यापारी बाजार पूरी तरह खुलने से 50 फीसदी कारोबार बढ़ने की संभावना जता रहे हैं, लेकिन मुश्किल हालात में बैंक अपने दिए कर्ज की वसूली में नाकाम हैं। जिले में बैंकों का करीब 700 करोड़ रुपये फंसा है। पिछले छह माह से लगी रोक की वजह से बैंक इसकी वसूली तक नहीं कर पा रहे हैं।

ऐसे में बैंक परिस्थितियां सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, रिकवरी न होने की वजह से बैंक लोन देने में हाथ खड़े कर रहे हैं। जिस कारण घर, शोरूम बनाने वालों के सपने अधूरे हैं। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सरकार ने 25 मार्च से लाकडाउन लागू कर दिया था। इसके चलते फैक्ट्रियां समेत कई बड़े प्रतिष्ठान बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया। कारोबार और व्यापार पूरी तरह से ठप पड़े थे।

इस बीच सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के मकसद से 1 जुलाई से अनलॉक लागू किया। लेकिन, अब तक स्थितियां सामान्य नहीं हो पाईं हैं। हालांकि, दशहारा, दीपावली आदि त्योहार के नजदीक आते ही कारोबार ने तो उछाल मारा है, लेकिन कोरोना काल में आमदनी न होने या कम हो जाने की वजह से लोग बैंकों से लिए कर्ज की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकार बताते हैं अप्रैल से वसूली न हो पाने की वजह से बैंकों पर बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते साल के मुकाबले इस साल दिसंबर तक कर्ज वसूली की उम्मीद कम दिख रही है।

केस – 1
समझ में नहीं आ रहा कैसे चुकाएं कर्ज
पुराना शहर निवासी अंजुम ने मोबाइल कारोबार को विस्तार देने के लिए बैंक से पांच लाख का बीते साल कर्ज लिया था। कारोबार अच्छा चल रहा था तो बैंक ने भी हाथों हाथ कर्ज दे दिया। इस रकम से दुकान में अधिक माल भी भरवाया गया। जनवरी, फरवरी और मार्च की किस्तों की नियमित अदायगी की, लेकिन अप्रैल से मामला गड़बड़ा गया, जो अभी तक नहीं संभल पाया है। अब दीपावली से कारोबारी उम्मीद बांधे हुए है।

केस-2
खुद का पैसा लगाकर नौकरी बचाने को मजूबर
एक निजी मोबाइल कंपनी में बतौर आरएम के पद पर कार्यरत अधिकारी ने नौकरी बचाने को क्रेडिट कार्ड के जरिये कंपनी से एक लाख रुपये के मोबाइल आर्डर किए, अब बाजार में मोबाइल की मांग नहीं होने पर मोबाइल का स्टाक ठप पड़ा है। इतना ही नहीं कोरोनाकाल में तीन महीने से सैलरी नहीं मिली तो उन्हें लोन पर ली कार की किस्तें चार महीने से चुकाना भारी पड़ रही है।

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