मुरादाबाद: मां के अपराध की सजा कारागार में कैद होकर भुगत रहे मासूम

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मुरादाबाद,अमृत विचार। बचपन, यह ऐसी अवस्था होती है जिसे एक बार फिर से जीने की चाहत हर व्यक्ति की होती है। मां का दुलार और दादा-दादी की ओर से सुनाई जाने वाली परियों की कहानियां, घर के आंगन में अठखेलियां करता बचपन और दोस्तों के साथ उछलकूद। भविष्य में होने वाली भागदौड़ और आने वाली …

मुरादाबाद,अमृत विचार। बचपन, यह ऐसी अवस्था होती है जिसे एक बार फिर से जीने की चाहत हर व्यक्ति की होती है। मां का दुलार और दादा-दादी की ओर से सुनाई जाने वाली परियों की कहानियां, घर के आंगन में अठखेलियां करता बचपन और दोस्तों के साथ उछलकूद। भविष्य में होने वाली भागदौड़ और आने वाली मुश्किलों से बेफिक्र होकर केवल मस्ती और शरारत भरे पल। अगर यह पल एक बार आपकी जिंदगी से निकल गए तो दोबारा कभी लौटकर नहीं आ सकते, हालांकि हर मासूम को ऐसा मस्ती भरा बचपन नसीब नहीं होता है।

किसी मासूम का बचपन आर्थिक हालातों के पाटों के बीच में पिस जाता है तो कोई ऐसे जुर्म की सजा भुगतता है, जिसे करना तो दूर उम्र की इस दहलीज में वह कल्पना तक नहीं कर सकता। हम बात कर रहे हैं मौजूदा समय में जेल में बंद उन नौ मासूमों की जो अपने परिजनों के साथ ही जेल की चारदीवारी में सजा काट रहे हैं। कोई छह माह तो कोई दो साल से मां का आंचल पाने के लिए जेल में सांस लेने को मजबूर हैं। केवल इनका कसूर यह है कि इनके मां-बाप आपराधिक गतिविधियों में पकड़े गए। एक मासूम बच्ची ने जिंदगी में आने के बाद जेल की चारदीवारी के अंदर ही आंखें खोलीं।

मुरादाबाद के अलावा अमरोहा व सम्भल की भी हैं महिला बंदी
करीब दस साल पहले अमरोहा व सम्भल जिला भी मुरादाबाद का हिस्सा होता था। अलग जिले बनने के बाद भी अभी तक सम्भल व अमरोहा में जेल नहीं हैं। लिहाजा वहां के बंदियों को भी मुरादाबाद जेल में रखा जाता है। मौजूदा समय में करीब 3100 सौ बंदी/कैदी जेल में हैं। जो क्षमता से करीब चार गुना है। जिसमें से महिला बंदियों की संख्या 137 हैं। जेल अफसरों के अनुसार अधिकतर महिलाएं दहेज संबंधी मामलों में जेल में सजा काट रही हैं।

एक मासूम की जेल में गूंजी किलकारी
जेल रिकार्ड के अनुसार इन मांओं के साथ करीब नौ मासूम भी सजा काटने को मजबूर हैं। जिसमें से सात तो बच्चियां और एक बच्चे हैं। नियमानुसार पांच साल तक इन मासूमों को अपनी मां से दूर नहीं किया जा सकता है। जिसमें से एक बच्ची की किलकारी ही जेल में गूंजी हैं। प्रसव पीड़ा होने पर महिला बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा दोनों को जेल भेज दिया गया था।

आधा लीटर दूध और मिलते हैं फल
केवल मां के आंचल के लिए अपना बचपन जेल की चारदीवारी के अंदर बिताने वाले मासूमों की देखभाल का जेल प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए जा रहे हैं। जेल अफसरों का दावा है कि हर मासूम को रोजाना आधा लीटर दूध व फल दिए जा रहे हैं। इसके अलावा उनके खेलने-कूदने के लिए भी अंदर इंतजाम किए गए हैं।

जेल अधीक्षक उमेश कुमार सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में करीब नौ बच्चे जेल में हैं। उनकी सेहत के साथ ही स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाता है। समय-समय पर चेकअप कराने के साथ ही उनको पढ़ाने के लिए नियमित रूप से दो शिक्षक आते हैं।

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