धान खरीद: निगरानी के साथ गड़बड़ी का भी केंद्र बिंदु बना ‘बरेली’

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

महिपाल गंगवार, बरेली। धान खरीद को पारदर्शिता के साथ पूरा कराने की मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारी तय की है। ऐसे में सभी जनपदों में निगारनी करने की जिम्मेदारी तो मंडल स्तर के अधिकारी संभाल रहे हैं, लेकिन इसी के साथ ही धान खरीद की गड़बड़ियों का केंद्र बिंदु भी ‘बरेली’ बन रहा है। अधिकांश क्रय केंद्र …

महिपाल गंगवार, बरेली। धान खरीद को पारदर्शिता के साथ पूरा कराने की मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारी तय की है। ऐसे में सभी जनपदों में निगारनी करने की जिम्मेदारी तो मंडल स्तर के अधिकारी संभाल रहे हैं, लेकिन इसी के साथ ही धान खरीद की गड़बड़ियों का केंद्र बिंदु भी ‘बरेली’ बन रहा है। अधिकांश क्रय केंद्र पर धान खरीद न होना, धान नहीं तुलने के साथ अन्य कमियां तो जिला स्तर पर सामने आ रही हैं, मगर धान ढुलाई समेत अन्य चीजों के ठेकों की धांधली ने मंडल स्तर पर क्रय एजेंसियों के अधिकारी और सिस्टम को सवालों ने घेर लिया है।

हाल ही में पीलीभीत में निकली गड़बड़ी में परिवहन ढुलाई के नाम पर हुए खेल में भी ठेका बरेली स्तर से ही किया गया था। इसमें भी शासन स्तर पर दी गई रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि जो ठेके हुए थे वह बरेली से हुए थे। इस पर कागजातों का मिलान वाहनों के नंबर से क्यों नहीं किया गया।

एक अक्टूबर से शुरू हुई धान खरीद को एक माह पूरे होने को है। शासन प्रशासन भी सख्ती के दावे कर रहा है। मगर, धरातल पर व्यवस्थाएं माफिया, बिचौलिया की सिस्टम से साठगांठ होने की वजह से जस की तस है। न तो क्रय केंद्रों की तस्वीर बदल सकी है, न ही किसानों का दर्द कम हुआ। किसान आज भी मंडियों में कई कई दिन तक ठहरता है फिर भी न तो उसके धान की तौल होती है न ही उसके ठहरने का मुकम्मल इंतजाम होता है। इतनी कठिनाईयों को झेलने के बावजूद भी शासन से निर्धारित मूल्य मिलना उसके लिए चुनौती भरा रहता है।

इससे बड़ी समस्या यह है कि क्रय केंद्रों पर धान में नमी का खेल मंडल के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर चल रहा है। केंद्र प्रभारी जिस धान को नमी बताकर लौटाते हैं वहीं, धान आढ़तिये 1200 रुपये क्विंटल तक में खरीद रहे हैं। उनके यहां ढेर लगे हैं। राइस मिलों पर भी बड़े पैमाने पर धान स्टाक किया जा रहा है।

कई अधिकारी भी आएंगे कार्रवाई की जद में
धान खरीद मामले में मुख्यमंत्री ने संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) प्रमोद कुमार श्रीवास्तव को निलंबित करने के साथ ही मामले की जांच मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद को सौंपी गई है। जिले के एक केंद्र प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई से मंडल के चारों जिलों में हड़कंप मचा है। आरएमओ, डिप्टी आरएमओ बरेली के अलावा पीलीभीत व बदायूं के डिप्टी आरएमओ पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसके अलावा धान खरीद से संबंधित कई अन्य अफसर कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

अफसरों की बात भी निरीक्षण तक सीमित
पारदर्शिता के साथ धान खरीद का दावा करने वाले अधिकारियों की बात पर गौर किया जाए तो वह मंडियों में निरीक्षण करने जाते हैं। केंद्र प्रभारियों को हड़काते हैं, अभिलखों को चेक करते हैं। खरीद कम होने पर फटकार भी लगाते हैं कहा जाता है धान कब से नहीं तुला, लापरवाही उजागर होने पर सख्ती की बात कही जाती, लेकिन उस वक्त तो मातहत हां में हां मिलाते हैं बाद में कई-कई दिनों तक धान मंडी में वैसे ही पड़ा रहता है और उसकी तौल तक नहीं हो पाती। मजबूरन किसानों को रात बिताना पड़ता है।

अफसरों की बढ़ती गईं जिम्मेदारियां, नतीजा शून्य
धान खरीद में क्रय केंद्रों की निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य विपणन विभाग के अलावा प्रशासन में जिला पंचायती राज विभाग, राजस्व विभाग आदि को दे रखी है। कागजों में सारे कर्मचारी आज भी प्राथमिकता के आधार पर धान खरीद करा रहे हैं। इससे वह अपना मूल काम तो छोड़ ही चुके हैं, लेकिन जिस काम में वह समय बिता रहे हैं वह काम भी ढंग से नहीं कर रहे हैं। बिचौलियों से साठगांठ सबकी चल रही है।

कागजों में ट्रक दौड़ा, नंबर निकला कार-बाइक का
माफिया, बिचौलिए और जिम्मेदार अफसर औने-पौने दामों में धान की खरीद कराने के अलावा परिवहन ढुलाई के नाम पर भी खेल करते हैं। पीलीभीत में पिछले दिनों धान की ढुलाई में लगे वाहनों के नंबरों में गड़बड़ी‌ सामने आई थी। इसकी शिकायत भी संभागीय खाद्य नियंत्रक प्रमोद कुमार तक पहुंची थी, लेकिन साठगांठ के चलते मामला रफा-दफा कर दिया।

जांच पड़ताल में पता चला था कि क्रय एजेंसी पीसीयू के वाहनों की सूची में जो नंबर परिवहन ढुलाई के लिए लगे ट्रक के बताए गए। चेक करने पर वह नंबर बाइक के निकले थे। इसके अलावा ढुलाई के लिए लगे ट्रकों में कुछ नंबर ट्रैक्टर के मिले थे। मगर, सूची में उन्हें ट्रक बताया गया था। इसके अलावा धान की परिवहन ढुलाई में कुछ ऐसे भी वाहन लगाए थे, जिनकी पंजीकरण वैधता समाप्त हो चुकी है। खरीद एजेंसी पीसीयू की परिवहन ढुलाई में लगे वाहनों का ठेका भी बरेली की एक फर्म से हुआ था।

संबंधित समाचार