Kanpur: शहर में हरित जंगल बनाकर रोकें बढ़ता तापमान व प्रदूषण; नगर निगम को मियावाकी पद्धति से जंगल विकसित करने के आदेश

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। शहरों का तेजी से विस्तार हो रहा है। शासन की चिंता है कि निकायों में तेजी से जनसंख्या व क्षेत्रफल में निरंतर वृद्धि के अनुपात में हरित क्षेत्र विकसित नहीं हो रहा है। इससे वायुमंडल के तापमान और प्रदूषण में  वृद्धि के साथ मानव जीवन के लिए अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। 

ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए नगर निगम और वन विभाग के सामने हरित क्षेत्र बढ़ाने की चुनौती है। इसे देखते हुए शासन ने उपवन योजना लांच कर नगरीय क्षेत्र में हरित वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम को शहरी क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से जंगल बनाने को कहा गया है। 

योजना के मुताबिक नगर निगम को एक एकड़ जमीन पर जंगल का विस्तार करना है। इसके लिए शासन की ओर डेढ़ से पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। शासन ने नगर निगम को इस संबंध में पार्कों व खुली भूमि का चयन कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मियावाकी पद्धति से नगर निगम ने अभी तक शहर में 8 पार्क विकसित किए हैं। 2 अन्य पार्क लगभग तैयार हैं। 2 नए स्थानों पर ऐसे पार्क और बनाने की तैयारी है।  

एक एकड़ क्षेत्रफल में बनाना है जंगल

शासन ने नगर निगम से कहा है कि ऐसे पार्क का चयन किया जाए, जिसमें कम से कम एक एकड़ का समर्पित क्षेत्र हो। अगर एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल है, तो ऐसे पार्क को दो भागों में बांट दिया जाए। शासन एक एकड़ भूमि पर जंगल बनाने के लिए डेढ़ से 5 करोड़ रुपये धन का आवंटन करेगा। 

निगरानी के लिए गठित होगी टीम

उपवन योजना विकसित करने और इसकी निगरानी के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की जाएगी। इसमें नगर निगम के जोनल अधिकारी, नामित इंजीनियर व उद्यान अधिकारी रहेंगे। टीम पार्कों का नियमित निरीक्षण कर त्रैमासिक रिपोर्ट पेश करेगी।

मियावाकी पद्धति के अभी 8 पार्क 

-    रूमा में चारागाह भूमि पर भूल-भुलैया (मेज पार्क) 
-     सराय मीता अखाड़ा पार्क के सामने 
-    गुप्तार घाट, सिविल लाइंस  
-    रत्न शुक्ल इंटर कॉलेज, किदवई नगर 
-    ट्रैफिक चिल्ड्रन पार्क, विजय नगर 
-    अंबेडकर पार्क, पनकी 
-    शनेश्वर मंदिर ग्रीन बेल्ट, विजय नगर 
-    शेखपुरा का जाना गांव 

यह पेड़ लगाए जाते 

अर्जुन, शीशम, गुलमोहर, पिलखान,जामुन शहतूत, मेहंदी, अशोक, पीपल, चंपा आदि के पौधे खास तकनीक से लगाए जाते हैं, जिससे यह तेजी से बढ़ते हैं।

शासन का पत्र आया है। उपवन योजना के अंर्तगत मियावाकी पद्धति से पार्क को विकसित किया जाएगा। शहर में नगर निगम पहले ही हरित क्षेत्र विकसित करने के काम लगा है। - मदन सिंह गर्ब्याल, नगर आयुक्त।

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