सीतापुरः दर्द साझा करने के लिए आस लगाये बैठे कटान पीड़ित, हाथ लगी सिर्फ मायूसी
सीतापुर, अमृत विचार। बैराजों से पानी का डिस्चार्ज कम होने से गुरुवार को नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर करीब 20 सेंटीमीटर गिरने से अब नदियां कटान हो रही है। जलस्तर गिरने से जहां बाढ़ का खतरा कम हुआ है वहीं बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें कम नहीं हुई है। कटान में काफी इजाफा बीती रात से देखा जा रहा। गांजरी इलाके में दर्जनों घरों सहित लोगों की कृषि योग्य भूमि भी नदी में समाहित हो चुकी है।
विकासखंड रेउसा इलाके में ग्राम गोलोक कोंडर के मजरों में जलस्तर घटकर नदी अपने दायरे में आ गई है। संपर्क मार्गों पर पहुंचा पानी अब गांवों सहित घरो और संपर्क मार्गों से पानी हटने लगा है। वहीं ग्राम रत्नगंज में बीती रात से ही कटान बहुत तेजी से हो रहा है। ग्राम रतनगंज के ग्रामीण आजाद, मोइन, अलामुद्दीन, हनीफ, अख्तर, सरीफ सहित करीब दर्जन लोगों के पकके मकान और नमाज के लिए बनी मस्जिद का एक हिस्सा नदी में समा गया। हालांकि कुछ मकानों के हिस्से गिरकर बह गए है, कुछ लटके हुए है जो लोगों के लिए किसी भी समय खतरा बन सकते है। ग्रामीण सोहन, सलीम ,बच्चउ, संतराम सहित अन्य लोगों के भवनों के किनारे पानी हिलोरे मार रहा है। कब किस वक्त कौन का भवन नदी में समा जाये किसी को भी अंदाजा नहीं है। ग्रामीण अपनी आंखों के सामने ही अपना आशियाना गिरते हुए देखकर विवस होते नजर आ रहे है। नदी के रुख को देखकर ग्रामीण पलायन कर काशीपुर तंबौर रोड पर डेरा डाल रखा है। इसके साथ ही गांव में बना भगवान शिव के मन्दिर का अस्तित्व भी खतरे में है। ग्रामीणों की माने तो मंदिर से 40 मीटर दूर ही नदी हिलोरे मार रही है।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
बैराज डिस्चार्ज
घाघरा बैराज 1,15127 क्यूसेक
शारदा बैराज 1,83480 क्यूसेक
बनबसा बैराज 53,080 क्यूसेक
कुल डिस्चार्ज 3,51,687
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