सावन महोत्सव: कृष्ण और द्रोपदी का संवाद सुन मंत्र मंत्रमुग्ध हुए श्रोता 

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार। वालिगंटन चौराहे पर एक निजी होटल में शनिवार शाम सावन महोत्सव को आयोजन किया गया। जिसमें देश भर से आये वरिष्ठ व युवा रचनाकार शामिल हुये। जिन्होंने हिन्दी काव्य प्रेमियों के लिए आयोजित इस सावन महोत्सव में अपनी कविताओं से नया रंग भर दिया।

इतना ही नहीं कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक जैसे विभिन्न विषयों पर अपने विचारों का प्रस्तुतीकरण किया। ग़ज़लों, गीतों और छंदों की रिमझिम फुहारों ने ऐसा मनमोहक समां बांधा कि दर्शकों का मन कभी प्रेम रस से प्रफ्फुलित हुआ तो कभी हास्य व्यंग्य में सराबोर। कभी भावुक हुए श्रोतागण तो कभी हृदय में ऊर्जा का संचार हुआ।

इस अवसर पर अलका निगम की कविता विवशवान हो रहे थे उद्धत, धरा से पीठ दिखाने को... गहन तिमिर के बाद फिर एक नया सवेरा लाने को... सुनकर दर्शक दीर्घा में बैठे लोग मंत्रमुग्ध हो गये। इस कविता के जरिये अलका निगम ने द्रोपदी और कृष्ण के कल्पनिक संवाद को सुनाया। जिसमें कुंती जब पांचों भाईयों में द्रोपदी को बांट रहीं थीं। तब द्रोपदी को असमंजस से कृष्ण ने जिस तरह निकाला था। उसका वर्णन किया गया।

वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे डॉ. जितेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए। 

इस सावन महोत्सव के आयोजक श्रेय तिवारी ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदी काव्य साहित्य की अभिवृद्धि और नवीन रचनाकारों को मंच प्रदान करना है। कलम के जादूगर नियमित रूप से ऐसे सम्मेलनों का आयोजन विभिन्न शहरों में करते रहते हैं।

सावन महोत्सव का संचालन कवयित्री पूजा श्रीवास्तव, कवयित्री अलका बलूनी पंत, कवयित्री प्रीति पांडेय, कवयित्री ऋतु तिवारी एवं कवयित्री हेमा सागरिका द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में कवि, गीतकार कुलदीप शुक्ला, दीपांशी शुक्ला, रिज़वान फरीदी, डॉ. बृजभूषण,ऋचा अग्रवाल, पंकज देहाती, विक्रम सिंह यादव बरनी, दुर्वेश कुमार, डॉ किरण दयाल, अमित अल्प, अजय साथी, सरिता त्रिपाठी, पद्मनाभ त्रिपाठी, अभिलाषा अरुण, निर्देश कुमार विन, सीमा वर्णिका, विजय पुरोहित बिजू, कृष्ण कुमार दूबे, सुधीर यादव, प्रकाश मित्रवत, चेतना तिवारी, तरुण जैन, सीमा श्रीवास्तव, विनय कुमार साहू निश्छल, पूनम नैन मलिक, जगन्नाथ राय, पारुल चौधरी, बीरेंद्र गौतम, ऊषा शर्मा,अंजू अहिरवार, मनोज पांडेय मुसाफिर, अर्चना झा, श्राबोनी गांगुली, विशु तिवारी, अंजू चौधरी, शशांक मणि यादव, संगीता वर्मा, भूपेंद्र राघव, निशा सक्सेना, अनीता अरोड़ा, ज्योति शर्मा, अंजना जैन और नीलम गुप्ता मौजुद रहे।
इन सभी रचनाकारों को हिंदी काव्य साहित्य के उत्थान में कार्यरत होने के लिए कलम के जादूगर समूह द्वारा 'केकेजे साहित्य गौरव सम्मान' से भी नवाज़ा गया।

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