मुरादाबाद: मां का बेटा बन घर की नैया खे रही नाहिद
मुरादाबाद, अमृत विचार। आज के इस युग में जहां अभी भी कई जगहों पर महिला वर्ग को पिछड़ी नजरों से देखा जाता है, वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो पुरुष वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बराबरी कर रही हैं। फिर चाहे वो क्षेत्र कोई सा भी क्यों न हो। कोई काम छोटा …
मुरादाबाद, अमृत विचार। आज के इस युग में जहां अभी भी कई जगहों पर महिला वर्ग को पिछड़ी नजरों से देखा जाता है, वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो पुरुष वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बराबरी कर रही हैं। फिर चाहे वो क्षेत्र कोई सा भी क्यों न हो। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, जब इच्छा कुछ अच्छा करने के लिए हो तो छोटा काम भी बड़ा बन जाता है। यह कहना है परिवहन निगम के पीतल नगरी डिपो में परिचालक के पद पर कार्यरत कुमारी नाहिद जमाल का।
नाहिद ने बताया कि वह हमेशा से वो करना चाहती थीं जो सबसे अलग हो। वर्तमान में लाखों लड़कियों के लिए वह किसी मिसाल से कम नहीं हैं। संभल के मोहल्ला कोट निवासी 30 वर्षीय नाहिद पांच भाई और तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने डबल एमए (उर्दू) तक की तालीम हासिल की है। पिता स्व. हनीफ खां परिवहन निगम में कार्यरत थे। चार वर्ष पहले अचानक उनका निधन हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी जैसे नाहिद पर ही आ गई।
नाहिद ने बिना किसी डर और शर्म के मृतक आश्रित कोटे में पिता के स्थान पर रोडवेज में महिला परिचालक के पद पर नौकरी ज्वाइन की। पिछले एक साल से वह मुरादाबाद-बरेली रुट पर परिचालक हैं। नाहिद बताती हैं कि शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन मन में कुछ अलग करने की होड़ और सामने मां के साथ-साथ सात भाई बहन की जिम्मेदारी थी, लेकिन अब किसी भी तरह की समस्या से डर नहीं लगता।
घर से निडर होकर बाहर निकलें बेटियां
छोटी उम्र में ही बेटियों के मन में एक बात बैठा दी जाती है कि वह पुरुष से कमजोर है। जबकि मेरी निगाह में यह सरासर गलत है। बेटियां निडर होकर अपने घर से बाहर निकलें और अपनी एक अलग पहचान बनाकर दूसरी बहनों के लिए मिसाल बनें। शुरुआत में दिक्कतों का आना लाजमी है,लेकिन एक समय के बाद किसी तरह की कोई समस्या खड़ी नहीं होगी।
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