Unnao: उद्योग प्रदूषित पानी से लोन को कर रहे ‘जहरीली’, इन विभाग के जिम्मदारों ने बंद कर रखी आखें, सवाल! 'कब होगी कार्रवाई'
सिटी मजिस्ट्रेट बोले, इसकी जांच कराकर संबंधित पर होगी कार्रवाई
उन्नाव, अमृत विचार। सदर व पुरवा विधानसभा क्षेत्र के किसानों के लिए कभी जीवन दायिनी कही जाने वाली लोन नदी का पानी अब पीना तो दूर सिंचाई तक के लिए बेकार साबित हो रहा है। हालात यह हैं कि इसके पानी से जो भी किसान अपने खेत की सिंचाई कर देते है वह बंजर की स्थिति तक पहुंच जाता है।
इससे क्षेत्र के किसानों में बीमारी फैलने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी बिगड़ रही है। ऐसा सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों और उद्यमियों की मिलीभगत के चलते हो रहा है। क्योंकि उद्यमी अफसरों का हाथ पीठ पर होने से अपने उद्योग से निकलने वाले केमिकलयुक्त व प्रदूषित पानी को नालों के जरिये सीधे लोन नदी में पहुंचा रहे हैं।
कामन इन्फ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीइटीपी) व प्रदूषण अफसरों की मिलीभगत से दही औद्योगिक क्षेत्र में संचालित स्लॉटर हाउसों व टेनरियों के संचालक खुले नालों से लोन नदी में प्रदूषित पानी गिरा रहे हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि स्लॉटर हाउस व टेनरी संचालकों को विभागीय अफसरों का संरक्षण प्राप्त है जिससे वे यह कारनामा खुलेआम करने से भी नहीं चूक रहे हैं।
अफसरों व उद्यमियों की मिलीभगत से लोन नदी के आज यह हालात हैं कि इसके प्रदूषित पानी से अगर किसी खेत की सिंचाई कर दी जाती है तो वह बंजर तक की स्थिति में पहुंच जाता है। इस कारण से किसानों ने लोन नदी के पानी से सिंचाई करनी बंद कर दी है।
उनका कहना है कि इसके पानी से सिंचाई करने पर फसलें नष्ट हो जाती हैं। वहीं लोन के प्रदूषित पानी से क्षेत्र के भूगर्भ में फ्लोराइड की भी समस्या बढ़ी है। इससे आसपास के गावों के ग्रामीण विकलांगता के अलावा दांत व पेट की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
क्षेत्र के युवक-युवतियों के लिये नहीं आ रहे रिश्ते
लोन नदी के किनारे बसे कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां के निवासी फ्लोराइड, आंख, दांत व विकलांगता समेत पेट की बीमारियों से ग्रसित हैं। स्थिति यह है कि वहां पर कोई भी अपने लड़के व लड़कियों की शादी तक करना नहीं चाहता है। जिससे क्षेत्र में युवक-युवतियों की शादियां भी नहीं हो रही हैं।
कभी पीने के साथ सिंचाई के काम आता था लोन का पानी
लोन नदी के पानी से किसान फसलों की सिंचाई करने के साथ घरेलू काम में भी उपयोग करते थे। लेकिन, अब इस पानी को पीने व खेतों की सिंचाई करना तो दूर अगर गलती से कोई इसमें स्नान कर ले तो शरीर में दाने और फफोले पड़ जाते हैं।
नदी के किनारे बसें इन गांव का फ्लोराइड हैं पानी
सदर व पुरवा विधानसभा की डेढ़ लाख से अधिक आबादी के एक सैकड़ा से अधिक गावों में चांदपुर, रायपुर बुजुर्ग, ओरहर, तारगांव, जमुका, बडौरा, नेवरना, जरगांव, तिवारी खेड़ा, पड़री खुर्द, भटखेरवा, जगेथा, पौंगहा, झाऊखेड़ा, मीरपुर, बैगांव, मझखोरिया, अतरसई ,मंगतखेड़ा, मिर्जापुर सुम्भारी, भूलेमऊ, गदोरवा, सेमरीमऊ पूरी तरह से फ्लोराइड की समस्या से जूझ रहे हैं।
बोले आरओ यूपीपीसीबी…
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल माथुर ने कहा कि जैसा आप बता रहे हैं मुझे तो कहीं भी ऐसा नहीं दिखा। आप हमारे कार्यालय आइये और दिखाइये कि कहां लोन में प्रदूषित पानी बहाया जा रहा है।
बोले सिटी मजिस्ट्रेट…
सिटी मजिस्ट्रेट राजीव राज ने कहा कि आपके द्वारा इसकी जानकारी मिली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ से इसकी जानकारी करता हूं। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। अगर ऐसा मिलता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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