प्रयागराज : श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में गुरुवार को फैसला सुनाएगी कोर्ट
अमृत विचार, प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में दाखिल आवेदन पर कल अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के संबंध में देवता और हिंदू पक्षों द्वारा दाखिल 18 मुकदमों की स्वीकार्यता को चुनौती दी गई है। मामले में न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की एकलपीठ कल यानी 1 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी।
मालूम हो कि लगभग 2 महीने पहले ही इस विवाद से जुड़े सभी पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट के समक्ष प्रबंध ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह, मथुरा की समिति ने मुख्य रूप से तर्क दिया था कि उपासना स्थलों के समक्ष लंबित मुकदमे हाईकोर्ट अधिनियम, 1991, परिसीमा अधिनियम, 1963 और विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 के प्रावधानों पर रोक लगाते हैं। पिछली सुनवाई में मस्जिद समिति के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि अगर हिंदू पक्षकारों का यह दावा सही माना जाता है कि मस्जिद का निर्माण 1968 के समझौते के बाद हुआ था तो वह मुकदमे में यह दावा कैसे कर सकते हैं कि उन्हें समझौते के बारे में 2020 में पता चला।
इसके अलावा उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया था कि स्थाई निषेधाज्ञा की प्रार्थना केवल उस व्यक्ति को दी जा सकती है जिसके पास मुकदमे की तारीख पर संपत्ति का वास्तविक कब्जा हो, चूंकि वादी (हिंदू पक्ष) के पास मस्जिद नहीं है, इसलिए वे स्थाई निषेधाज्ञा के लिए प्रार्थना नहीं कर सकते हैं। दूसरी ओर वादीगण ने तर्क दिया था कि किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण करना, उसकी प्रकृति बदलना और बिना स्वामित्व के उसे वक्फ संपत्ति में बदलना, कानून की दृष्टि में गलत है और इस मामले में वक्फ अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे, क्योंकि विवादित संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है। मालूम हो कि पूरा विवाद मथुरा में मुगल बादशाह औरंगजेब के समय से शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म स्थान पर स्थित मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।
