प्रयागराज : अधिवक्ताओं की असामयिक  हड़ताल से संबंधित कार्यवाही के मामले की सुनवाई 12 सितंबर को सुनिश्चित

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया में चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल के संबंध में दाखिल जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा से प्रदेश के विभिन्न बार एसोसिएशनों द्वारा गत 6 महीनों के अंदर किए गए हड़ताल और बार काउंसिल द्वारा उस पर की गई कार्रवाई के बारे में पिछली सुनवाई में जवाब मांगा था, लेकिन सोमवार को भी सुनवाई के दौरान जवाब ना दाखिल करने पर कोर्ट ने मामले को आगामी 11 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने तहसील बार एसोसिएशन, रसड़ा, बलिया द्वारा 31 जनवरी 2023 से जारी हड़ताल के संबंध में पारित किया है।

अधिवक्ताओं की ओर से असामयिक हड़ताल को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि अधिवक्ताओं की हड़ताल से न्याय समय की बर्बादी होती है, लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जाती है, जिससे न्यायिक वितरण प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोर्ट में आने वाला प्रत्येक नागरिक अपनी सुरक्षा के प्रति आसान्वित होकर आता है। बहुत से लोग समाज के दलित और कमजोर वर्गों से होते हैं, ऐसे में अधिवक्ताओं का पहला कर्तव्य अपने मुवक्किलों की तकलीफ को दूर करना और उन्हें न्यायिक सुविधा उपलब्ध कराना है।

हालांकि बार काउंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता द्वारा लिखित रूप में कोर्ट को यह बताया गया था कि बलिया में कोई हड़ताल नहीं है, जबकि एक याची जंग बहादुर कुशवाहा ने जनहित याचिका दाखिल कर सक्षम प्राधिकारियों को हड़ताल कर रहे अधिवक्ताओं और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आवश्यक और तत्काल कार्यवाही के निर्देश की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया

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