अब बरेली में भी हो सकेगी डीएनए की जांच
बरेली, अमृत विचार। अपराध के बड़े मामलों में कई बार डीएनए रिपोर्ट की जरूरत होती है। लखनऊ और गाजियाबाद में डीएनए की जांच होने के चलते कई बार रिपोर्ट आने में एक से दो साल तक का समय लग जाता है। रिपोर्ट में देरी की वजह से जांच रुकी रहती है लेकिन जल्द ही इस …
बरेली, अमृत विचार। अपराध के बड़े मामलों में कई बार डीएनए रिपोर्ट की जरूरत होती है। लखनऊ और गाजियाबाद में डीएनए की जांच होने के चलते कई बार रिपोर्ट आने में एक से दो साल तक का समय लग जाता है। रिपोर्ट में देरी की वजह से जांच रुकी रहती है लेकिन जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा। जल्द ही डीएनए जांच बरेली में ही होनी शुरू हो जाएगी।
परसाखेड़ा में तैयार हो रही फोरेंसिक लैब में डीएनए सेक्शन भी तैयार किया जा रहा है। इसके बाद डीएनए जांच के लिए अन्य शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा यहां साइबर सेक्शन भी तैयार होगा। अब लैब को सी से बदलकर बी कैटगरी में कर दिया गया है।
फोरेंसिक लैब में डीएनए सेक्शन और साइबर सेक्शन खोलने के संबंध में 26 अक्टूबर को एक मीटिंग भी हुई थी। बुधवार को लैब के संबंध में प्रमुख सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग भी होनी थी जिसमें निर्माणाधीन विधि विज्ञान प्रयोगशाला की नोडल अधिकारी उपनिदेशक डॉ. वंदना दुबे और बरेली से फील्ड यूनिट की टीम शामिल होने के लिए पहुंची थी लेकिन तकनीकि कारणों की वजह से वीडियो कांफ्रेंसिंग नहीं हो सकी। इसके चलते सभी से लिखित में रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही इस संबंध में वीडियो कांफ्रेंसिंग की जाएगी।
2016 से चल रही प्रक्रिया
बरेली में सी कैटगरी की फोरेंसिक लैब बनाने की प्रक्रिया वर्ष 2016 से चल रही है। लैब का निर्माण 7910 वर्ग मीटर के दायरे में किया जा रहा है। वर्ष 2016 में लैब निर्माण का एस्टीमेट 23 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। सी कैटगरी की लैब में सीरोलॉजी, बायोलॉजी, केमिस्ट्री सेक्शन बनाए जा रहे हैं। अभी तक तीन मंजिला बिल्डिंग बनायी जा रही थी, जिसमें दो मंजिला का लेंटर भी पड़ चुका है। करीब एक साल पहले ग्रीन बेल्ट की वजह से निर्माण कार्य रुक गया था लेकिन बाद में इस समस्या का भी समाधान हो गया।
2021-22 तक पूरा हो जाएगा निर्माण
अब लैब को बी कैटेगरी का बनाया जा रहा है, जिसके तहत डीएनए और साइबर सेक्शन भी खोला जाएगा। डीएनए सेक्शन में डीएनए सैंपल की जांच की जाएगी और साइबर सेक्शन में साइबर क्राइम से जुड़े मामलों में कम्प्यूटर, लैपटाप व मोबाइल का डाटा रिकवर किया जाएगा। बी कैटगरी की लैब के लिए बिल्डिंग को चार मंजिला बनाया जाएगा, जिसके निर्माण में करीब 43 करोड़ की लागत आएगी और लैब का निर्माण कार्य 2021-22 तक पूरा हो जाएगा।
डीएनए जांच वाली प्रदेश की तीसरी फोरेंसिक लैब होगी
डीएनए की जांच पहले सिर्फ लखनऊ में होती थी। उसके बाद गाजियाबाद की फोरेंसिक लैब में जांच शुरू की गई। बरेली की फोरेंसिक लैब प्रदेश में तीसरी लैब होगी जिसमें डीएनए की जांच होगी। बरेली की लैब में बैलेस्टिक जांच भी होगी।
कई मामलों की लटकी है जांच
बिथरी चैनपुर में बड़ा बाईपास पर ढाई साल पहले बस और ट्रक के बीच हुई भीषण टक्कर में 25 यात्रियों की जान चली गई थी। शवों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल भेजे गए थे लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। कुछ समय पहले शहर के एक अस्तपाल से बच्चा चोरी के मामले की डीएनए रिपोर्ट भी डेढ़ साल बाद आयी थी।
फोरेंसिक लैब निर्माण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। लैब को सी से बदलकर बी कैटगरी में किया गया है। इसके तहत डीएनए व साइबर सेक्शन भी खोले जाएंगे। -रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
