लखीमपुर खीरी : लेखपाल को पीटने वाले हमलावर पांच दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं
प्रधान, पूर्व प्रधान समेत तीन लोगों के खिलाफ दर्ज है रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। अपने कारनामों को लेकर चर्चा में रहने वाली सिंगाही पुलिस सरकारी कर्मचारियों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर भी गंभीर नहीं है। ग्राम पंचायत निबौरिया के लेखपाल मोहन कश्यप की पिटाई के मामले में पांच दिन बीत गए, लेकिन पुलिस अभी तक नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी। इससे लेखपालों में पुलिस के प्रति जबरदस्त रोष है।
दरअसल लखीमपुर शहर के मोहल्ला राजगढ़ निवासी लेखपाल मोहन कश्यप के पास ग्राम पंचायत निबौरिया और कड़िया का चार्ज है। 16 अगस्त की शाम करीब पांच बजे पंचायतों का सरकारी कार्य निपटाकर तहसील वापस जा रहे थे। सिंगहा मोड़ के पास गांव मोतीपुर निवासी हरीश पटेल, निबौरिया ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि पूर्व प्रधान वीरेंद्र वर्मा और प्रधान निबौरिया झगडू ने अपने अन्य पांच अज्ञात लोगों के साथ लेखपाल की बाइक रोक ली। बाइक की चाभी निकालकर मारपीट करने लगे। धारदार हथियार से भी जान लेवा हमला करने की कोशिश की। संपूर्ण समाधान दिवस में तहरीर देने पर पुलिस ने 18 अगस्त की शाम आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर थी। घटना को पांच दिन बीच गए, लेकिन पुलिस अभी तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। गिरफ्तारी न होने से लेखपालों में जबरदस्त रोष है। लेखपालों ने 48 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
खलिहान की जमीन पर कब्जा बना विवाद की वजह
ग्राम पंचायत निबौरिया के मजरा बैजनाथ पुरवा में एक प्रधान ने रुपये लेकर खलिहान की जमीन पर मौसमी बानों को तत्कालीन लेखपाल की मिलीभगत से कब्जा करा दिया था। इस पर उसने मकान भी बना लिया। इस मामले का जब खुलासा हुआ तो डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने 11 मई 2023 को अवैध निर्माण ध्वस्त कराकर जमीन भूमि प्रबंध समिति को वापस कराने के आदेश दिए थे, लेकिन तहसील प्रशासन इस निर्माण को ध्वस्त कराने में नाकाम रहा। अपनी गर्दन फंसती देख प्रधान झगड़ू और उनके प्रतिनिधि वीरेंद्र वर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर लेखपाल मोहन कश्यप पर आवंटित की गई ग्राम पंचायत के खलिहान की भूमि को आबादी में दर्ज कराने के लिए किए गए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने का दबाव बना रहे थे। लेखपाल ने जब इसका विरोध किया तो उसकी पिटाई कर दी गई।
लेखपाल की पिटाई मामले में तहसील अफसर भी लापरवाह
लेखपाल मोहन कश्यप की पिटाई के मामले में तहसील प्रशासन भी काफी लापरवाह बना हुआ है। इसके पीछे की वजह राजनीतिक दबाव बताया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरोपी भाजपा के एक कद्दावर नेता के करीबी माने जाते हैं। इसलिए एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक इस मामले को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। शायद यही वजह है कि पुलिस भी राजनीतिक दबाव में आकर आरोपियों की गिरफ्तारी करने से कतरा रही है।
लेखपाल संघ ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
लेखपाल संघ लखीमपुर और निघासन ने साथी लेखपाल की पिटाई मामले में कड़ा रोष जाहिर किया है। साथ ही पुलिस और प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार नहीं करती है तो लेखपाल संघ सभी तहसीलों में कार्य बहिष्कार कर आंदोलन करेगा। लेखपाल संघ तहसील के अध्यक्ष रामकिशन मिश्रा ने बताया कि सदर लेखपाल के साथ मारपीट करने की घटना बेहद निंदनीय है। इस तरह से लेखपाल क्षेत्र में कैसे काम कर पाएगा। पुलिस आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करे। अन्यथा बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। लेखपाल संघ तहसील निघासन के अध्यक्ष ज्योति प्रकाश वर्मा ने कहा कि किसी भी लेखपाल के साथ अभद्रता और मारपीट को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आपसी-विचार विमर्श कर आंदोलन की रूप रेखा तय होगी।
