प्रयागराज : कांग्रेस की घर-घर गारंटी योजना के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज
अमृत विचार, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग के खिलाफ दाखिल एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट याची की ईमानदारी और साख से संतुष्ट नहीं है। याची ने अपने बारे में कुछ भी नहीं बताया है। याची के अधिवक्ता द्वारा उचित शैक्षणिक योग्यता का खुलासा करते हुए नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता की मांग के साथ वर्तमान याचिका वापस लेने की शर्त पर याचिका खारिज कर दी गई।
उक्त आदेश में न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता भारती देवी की याचिका को खारिज करते हुए पारित किया। दरअसल हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा अपनी बहुचर्चित 'घर-घर गारंटी योजना' को लेकर वर्तमान याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस की उक्त योजना मौद्रिक प्रोत्साहन के माध्यम से वोट हासिल करने का एक अनैतिक और अवैध प्रयास था।
मालूम हो कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा था कि हम करोड़ों लखपति बनाने जा रहे हैं। हमारी सरकार बनेगी तो हम सबसे पहले गरीबों की लिस्ट बनाएंगे और हर परिवार की एक महिला का नाम चुना जाएगा, जिसके अकाउंट में 5 जून 2024 को 8,500 भेजे जाएंगे। यह अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर और उसके आगे भी खटाखट होता रहेगा। याचिका में आगे बताया गया था कि इस योजना की शुरुआत में स्थापित चुनावी कानूनों और मानदंडों का भी सीधा उल्लंघन किया है। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने पार्टी को इस योजना का प्रचार करने से रोकने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की।
कांग्रेस की घर-घर गारंटी योजना में वोट के बदले विभिन्न वित्तीय और भौतिक लाभों का वादा करते हुए गारंटी कार्ड वितरण करना शामिल था, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(1)(ए) के तहत रिश्वतखोरी के बराबर है और भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 171 (बी) और 171 (ई) के तहत दंडनीय अपराध है। कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया के निष्पक्षता से समझौता करते हुए ऐसे प्रचार जारी रखे और ईसीआई मूकदर्शन बना रहा। याचिका में पार्टी के चुनाव चिन्ह जब्त करने और 99 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की भी मांग की गई थी।
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