लखनऊ: लिफ्ट में फंसा हृदय रोगी, ब्याज के साथ दो करोड़ देने का आदेश
लखनऊ, अमृत विचार। लिफ्ट में गड़बड़ी के कारण पौन घंटे तक एक हृदय रोगी फंसा रहा। शिकायत करने के बाद भी कंपनी ने लिफ्ट को ठीक नहीं कराया। कंपनी के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया गया। आयोग ने पूरे मामले की सुनवाई करने के बाद ब्याज के साथ अगस्त 2012 से जुलाई 2024 तक 2 करोड़ 82 लाख 7 हजार रुपये वादी को देने का आदेश दिया।
मेसर्स संदीप डेवलपर्स ने कल्याण (गार्डन व्यू) रिंग रोड इंदिरा नगर में 10 मंजिला आवासी भवन का निर्माण किया। जिसमें जॉनसन कंपनी की लिफ्ट लगाई गई। लिफ्ट लगने के पांच माह बाद ही संचालन में गड़बड़ी होने लगी। लिफ्ट 8वें और 9पें तल पर फंस गई और उसमें एक हृदय रोगी भी 45 मिनट तक फंसा रहा। रोगी को किसी तरह बाहर निकाला गया। लिफ्ट में हो रही गड़बड़ी को लेकर कंपनी से शिकायत की गई मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। मेसर्स संदीप डेवलपर्स ने अपने सहयोगी कृष्णा के माध्यम से राज्य उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
लिफ्ट कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि आटो रेस्क्यू डिवाइस न लगाने के कारण दिक्कत हुई। आयोग ने देखा कि जो कोटेशन और विशिष्टताएं दी गई थीं उसमें कहीं भी एआरडी (आटो रेस्क्यू डिवाइस) के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। कंपनी ने कभी भी परिवादी से इसे लगवाने के लिए नहीं कहा। आयोग ने पूर्व में हुई दुर्घटनाओं का भी जिक्र किया। आयोग ने कहा कि लिफ्ट में कमी के कारण लोगों के आगे जीवन का संकट खड़ा हुआ। आयोग के सदस्य राजेंद्र सिंह और सुधा उपाध्याय ने अपने निर्णय में कहा कि शिकायतकर्ता को 8 लाख 40 हजार रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से निर्णय के 30 दिन के भीतर अदा किया जाए। निर्धारित अवधि में उक्त राशि न देने पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। साथ ही लिफ्ट की आपूर्ति में विलंब के कारण 2 लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाए। सेवा में कमी और अनुचित व्यापार के लिए 25 लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से, 30 लाख रुपये आर्थिक क्षति और ख्याति में कमी के लिए दिया जाए। वाद व्यय के लिए 50 हजार रुपये दिए जाएं। साथ ही मानव जीवन पर संकट उत्पन्न होने के कारण 50 लाख रुपये 12 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज की दर से दिए जाएं। आयोग के दोनों सदस्यों ने कंपनी को आदेश दिया कि 1 अगस्त 2012 से जुलाई 2024 तक कुल 2 करोड़ 82 लाख 7 हजार रुपये निर्णय के तीस दिन के भीतर अदा किया जाए।
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