बरेली: अफसर अंजान, कमीशन के खेल में प्रधान-सचिव मालामाल
बरेली, अमृत विचार। इक्का-दुक्का ग्राम पंचायतों में कार्रवाई कर भले ही अफसर पीठ थपथपा रहे हों लेकिन जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सोलर लाइटें लगवाने में हुए गोलमाल पर अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। गांवों को रोशन करने की मुहिम कुल मिलाकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। नेडा द्वारा दी जाने …
बरेली, अमृत विचार। इक्का-दुक्का ग्राम पंचायतों में कार्रवाई कर भले ही अफसर पीठ थपथपा रहे हों लेकिन जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सोलर लाइटें लगवाने में हुए गोलमाल पर अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। गांवों को रोशन करने की मुहिम कुल मिलाकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
नेडा द्वारा दी जाने वाली सोलर लाइटें और ग्राम प्रधानों द्वारा स्वयं लगवाई गईं लाइटों की कीमत में भारी अंतर है। कमीशनखोरी के खेल में प्रधान, सचिव आदि ने वारे-न्यारे कर लिए हैं। मामले की सही तरीके से जांच हुई तो कई और की गर्दन फंसना तय माना जा रहा है।
ग्रामीण अंचलों में बिजली कटौती की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए करीब चार साल पूर्व सोलर लाइट लगाने की कवायद शुरू हुई थी। इसके कुछ समय बाद ही इसमें गड़बड़ी की शिकायतें पहुंचने लगीं। एक अनुमान के मुताबिक, जिले के 15 ब्लॉकों के 1195 गांवों में ग्राम पंचायत निधि से पांच हजार से अधिक सोलर लाइटें लगाई जा चुकी हैं। मनमानी का आलम यह रहा कि कुछ गावों में पांच से दस तो कुछ में 20 से 30 सोलर लाइटें लगा दी गईं।
हाल ही में आंवला की ग्राम पंचायत दराबनगर में 100 सोलर लाइटें लगवाने के नाम पर डीपीआरओ ने गोलमाल पकड़ा था। जांच में मौके पर 50 फीसदी लाइटें नहीं मिलने पर प्रधान की पावर सीज कर दी गई थी। इसके अलावा नवाबगंज और फरीदपुर ब्लाक में इसी तरह की गड़बड़ी होने की बात निकलकर सामने आई थी।
वहीं खास बात यह रही कि बाजार में जिस लाइट की कीमत 13 से 15 हजार रुपये थी, उसकी कीमत 21 से 22 हजार की दर्शाकर ठेकेदार को भुगतान करा दिया गया था। हालांकि इक्का दुक्का मामले में प्रधान और सचिवों पर कार्रवाई से अफसर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। वहीं, दबी जुबान से प्रधान भी स्वीकार कर रहे कि सरकारी धन अगर अधिकारियों की मंशा के अनुरूप नहीं खर्च करते हैं तो उन्हें परेशान होना पड़ता है।
नेडा विभाग से खरीदने का है प्रावधान
ग्राम पंचायतों में नियमानुसार सोलर लाइटें नेडा विभाग से ही लगनी चाहिए। मगर, कमीशनखोरी के चक्कर में विभाग नेडा से लाइटों की खरीद नहीं करता। नेडा विभाग के अफसरों की मानें तो कई साल से उनके यहां से लाइटों की खरीद ही नहीं की गई। यह आलम तब है जब निदेशक पंचायती राज यूपी नेडा और उससे संबद्ध एजेंसियों से ही सोलर लाइट खरीदे जाने के निर्देश दे चुके हैं।
“जांच में पिछले दिनों आंवला की ग्राम पंचायत दराबनगर में सोलर लाइट लगवाने के नाम पर गड़बड़ी का मामला सामने आया था। जिन सोलर लाइटों को कागजों में दर्शा गया वह मौके पर नहीं दिखी। इस मामले में प्रधान पर कार्रवाई करने के साथ ही सचिव को नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके अलावा जो भी मामला जानकारी में आएगा उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।” -धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
