वायु प्रदूषण: देश में सबसे जहरीली हुई मुरादाबाद की हवा
मुरादाबाद, अमृत विचार। दिन में धूप खिली, मगर शाम होते-होते बड़ा दर्द दे गई। शाम को मुरादाबाद देश के सबसे खतरनाक शहर में शीर्ष पर पहुंच गया। मौसम विभाग के रिकार्ड में मुरादाबाद की हवा सबसे खराब हो गयी। वैसे तो रोजाना की तुलना में शहर एक्यूआई रीडिंग घटी, लेकिन उसके बाद भी हवा की …
मुरादाबाद, अमृत विचार। दिन में धूप खिली, मगर शाम होते-होते बड़ा दर्द दे गई। शाम को मुरादाबाद देश के सबसे खतरनाक शहर में शीर्ष पर पहुंच गया। मौसम विभाग के रिकार्ड में मुरादाबाद की हवा सबसे खराब हो गयी। वैसे तो रोजाना की तुलना में शहर एक्यूआई रीडिंग घटी, लेकिन उसके बाद भी हवा की खराबी के मामले में देश के दस प्रमुख शहरों में सबसे ऊपर पहुंच गयी।
एनजीटी के आदेश से प्रभावित जिलों में मुरादाबाद भी है। इस वजह से यहां प्रशासन ने पटाखा की बिक्री और प्रयोग पूरी तरह से रोक दिया है। इसके साथ ही शहर की हवा को साफ बनाने के हर आदेश के पालन का नगाड़ा भी बजाया जा रहा है। नगर निगम की टीम ने पौधों पर पानी की बौछार भी मारी। इसके साथ सड़क किनारे बालू और गिट्टी का कारोबार करने वालों को भी रोका गया। शहर की सफाई को लेकर भी कई सरकारी प्रयास भी हुए, मगर उसका लाभ देर शाम तक नहीं दिखा।
सुबह की धूप ने चिकित्सकों के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करने वालों को रोमांचित किया लेकिन, शाम होते ही मौसम में धुले जहर ने विभाग की स्क्रीन पर खलबली मचा दी। शाम को मुरादाबाद देश के सबसे गंदे शहर के रूप में सामने आ गया। हालांकि यह नौबत कई बार आ चुकी है। पिछले दस दिन से शहर प्रदूषण के मामले में देश के प्रमुख दस शहर में शामिल है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस हालात के लिए जिसे जिम्मेदार मान रहा है, उसे आम आदमी मानने को तैयार नहीं है। चटख धूप के बाद शाम को शहर की वायु गुणवत्ता की खराबी से डरा दिया। जबकि अभी दिवाली और भैया दूज का त्योहार बाकी है।
प्रदूषण प्रभावित देश के दस प्रमुख शहर
शहर एक्यूआई
मुरादाबाद 382
ग्वालियर 371
गाजियाबाद 355
भोपाल 348
जींद 345
दिल्ली 334
ग्रेटर नोयडा 330
कानपुर 328
आगरा 324
फरीदाबाद 322
(एक्यूआई स्रोत- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की साइट)
प्रतिबंध से पटाखा कारोबार पर लटक गया ताला
बढ़ते प्रदूषण ने इस बार दिवाली की धूम पर रोक लगा दी। आतिशबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। आदेश के पालन में बुधवार दोपहर को प्रशासन और पुलिस ने महानगर आतिशबाजी के सामान बनाने वाले गोदाम बंद करवा दिया।अब गोदाम दिवाली बाद खोले जाएंगे। किसी ने खोला तो उसके खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तहत जुर्माना चुकाना पड़ेगा। जबकि गोदाम संचालकों का आरोप है सरकार को आतिश के कारोबार पर रोक लगाने का निर्णय पहले होना चाहिए था। कारोबारियों ने लाखों रुपये के पटाखे खरीद लिए हैं।
अब उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। पीतलनगरी बलदेवपुरी में बने पटाखा के गोदामों पर ताले लटक गए। गोदाम संचालक पटाखे लेने आने वालों को टरकाते नजर आए। यहां हर वर्ष दिवाली पर्व पर लोग पांच से छह करोड़ रुपये के पटाखों का कारोबार होता है। दिवाली से पूर्व ही पटाखों को जलाने का काम शुरू कर दिया जाता है। ऐसे में इस बार दिवाली पर पटाखे नहीं बजाने से आमजन के रुपये बचेंगे वहीं प्रदूषण नहीं होगा। जिले में पटाखों के 25 गोदाम हैं, जिन्हें बंद करने के लिए प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
हर साल पटाखे बजाने से होते थे हादसे
हर साल पटाखे जलाने से झुलसने के अनेक मामले आते है। बीते साल स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 36 मामले आए। जिसमें 10 मुरादाबाद के थे, जबकि अन्य देहात क्षेत्र के थे। ये वे मामले हैं जो इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में आए। अनेक लोग निजी अस्पतालों में इलाज करवा लेते हैं। जो बाद में रिकार्ड में नहीं आते। पटाखों पर प्रतिबंध से हादसों पर भी विराम लगेगा।
बोले पटाखा कारोबारी
हर साल प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता है। ऐसे में एनजीटी को पटाखों पर बैन तीन से चार माह पहले ही लगाना चाहिए। ताकि कारोबारी दिवाली से पहले पटाखों का स्टॉक न करें। अंतिम समय पर पटाखों पर प्रतिबंध लगने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल है।
नितिन अग्रवाल, पटाखा कारोबारी
राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी
मुरादाबाद की हवा की गुणवत्ता खराब है। प्रदूषण के मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का संदर्भ लेते हुए मुरादाबाद सहित 13 जिलों में पटाखा को और खतरनाक माना है। इस संबंध में राज्य सरकार के ओर से जारी आदेश का पालन कराया जा रहा है। पटाखा की बिक्री और इसका प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सिविल प्रशासन से लेकर पुलिस विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। मुरादाबाद में पटाखा की खरीद बिक्री नहीं होगी और प्रयोग पर पूर्णत: रोक है।
