फरीदपुर में मिले डिप्थीरिया से संक्रमित बच्चे
बरेली, अमृत विचार। जिले में डिप्थीरिया का कहर एक बार फिर से शुरू हो गया है। इस वर्ष अभी तक 20 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से चार की मौत हो चुकी है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान बीमारी फैलने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। वहीं, विभाग …
बरेली, अमृत विचार। जिले में डिप्थीरिया का कहर एक बार फिर से शुरू हो गया है। इस वर्ष अभी तक 20 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से चार की मौत हो चुकी है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान बीमारी फैलने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। वहीं, विभाग के पास एंटीडिप्थीरियल सीरम भी नहीं बचे हैं। इसके लिए अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर मांग की है। फिलहाल, अधिकारी इसे यहीं से खरीदकर बीमार का इलाज कर रहे हैं।
बीते करीब चार माह से लगातार बीमारों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीते दिनों दलेल नगर, कुंआडांडा और फरीदपुर, मझगवां, फतेहगंज में डिप्थीरिया पीड़ित कई बच्चे मिले थे। जिले में इस साल अब तक चार बच्चों की डिप्थीरिया से मौत भी हो चुकी है। अब एक बार फिर फरीदपुर में डिप्थीरिया के दो नए मामले सामने आने से विभाग में हड़कंप मचा है। फरीदपुर सीएचसी से जब एंटीडिप्थीरियल सीरम की मांग की गई तो इसका पता चला। स्वास्थ्य विभाग के सीएमएसडी स्टोर में इंजेक्शन की पहले से ही किल्लत चल रही है। स्थानीय स्तर पर चार इंजेक्शन का इंतजाम कर फरीदपुर भेजा गया है। हालांकि, दो बच्चों के लिए 12 इंजेक्शन की मांग की गई है।
कैसे होता है डिप्थीरिया?
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. आरएन सिंह ने बताया कि डिप्थीरिया एक प्रकार के संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है। इसे आम बोलचाल में गलघोंटू भी कहा जाता है। यह कॉरीनेबैक्टेरियम बैक्टीरिया के इंफेक्शन से होता है। इसकी चपेट में ज्यादातर बच्चे आते हैं। हालांकि, बीमारी बड़ों में भी हो सकती है। बैक्टीरिया सबसे पहले गले में इंफेक्शन करता है। इससे श्वांस नली तक इंफेक्शन फैल जाता है। इंफेक्शन की वजह से एक झिल्ली बन जाती है जिसकी वजह से मरीज को श्वसन में दिक्कत होने लगती है। एक स्थिति के बाद इससे जहर निकलने लगता है जो खून के जरिए ब्रेन और हार्ट तक पहुंच जाता है और उसे डैमेज करने लगता है। इस स्थिति में पहुंचने के बाद मरीज की मौत का खतरा बढ़ जाता है। डिप्थीरिया संचारी रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है।
ये होते हैं लक्षण:
सांस लेने में कठिनाई
गर्दन में सूजन, ठंड लगना
बुखार, गले में खराश, खांसी
इंफेक्शन मरीज के मुंह से शुरू होकर नाक और गले तक फैल जाता है
बच्चों का इस उम्र में होता है टीकाकरण
टीकाकरण से बच्चे को डिप्थीरिया के प्रकोप से बचाया जा सकता है। नियमित टीकाकरण में डीपीटी (डिप्थीरिया, परटूसस काली खांसी और टिटनेस) का टीका लगाया जाता है। एक साल के बच्चे को डीपीटी के तीन टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा और चार साल की उम्र पर पांचवां टीका लगता है। टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया होने की संभावना नहीं रहती है। बच्चों को डिप्थीरिया का जो टीका लगाया जाता है वह 10 वर्ष से ज्यादा समय तक प्रभावी नहीं रहता है। लिहाजा, बच्चों को 12 साल की उम्र में दोबारा टीका लगवाना चाहिए।
