कासगंज: तालाब का निर्माण किया नहीं पर हो गया 35 लाख का गबन, अब जांच को पहुंची टीम
प्रमुख सचिव लघु सिंचाई से की गई थी विभागीय गबन की शिकायत
उदित विजयवर्गीय, गंजडुंडवारा। विकास क्षेत्र के गांव सिकंदरपुर ढाव में लघु सिंचाई विभाग द्वारा तालाब निर्माण कराए बिना 35 लाख गबन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जिसकी जांच को तीन सदस्यी कमेटी का गठन किया गया था। जांच को गठित कमेटी के सदस्यों ने शुक्रवार को मौके पर पहुंच जांच पड़ताल की। जिसके बाद से विभाग मे खलबली मची हुई है।
गांव सिकंदरपुर ढाव मे लघु सिचाई विभाग द्वारा 35 लाख से तालाब का निर्माण कराया गया था। लेकिन तालाब निर्माण को चिह्नित जगह मानक के विरुद्ध थी। वहीं शिकायतकर्ता के मुताबिक तालाब भी नदारद था। इस संबंध में शिकायकर्ता ने अधिशासी अभियंता अभिराम प्रसाद लघु सिचाई खण्ड अलीगढ़ के संरक्षण में अवर अभियंता उमेश कुमार ने अपने संगे संबंधियों को ठेका देकर तालाब निर्माण कराए बिना विभागीय मिलीभगत से भुगतान करा गबन सहित भ्रष्ट्राचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे। मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव लघु सिंचाई लखनऊ सहित वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत भी की गई। जिसके बाद प्रकरण की जांच को प्रमुख सचिव लघु सिंचाई, लखनऊ की अधीक्षण अभियंता मेरठ को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए गए। अधीक्षण अभियंता ने जांच को तीन सदस्यीयी जांच कमेटी का गठन किया। अधिशासी अभियंता लघु सिचाई खण्ड हापुड़ की अध्यक्षता में जांच को तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। जिसमें अधिशासी एवं सहायक अभियंता लघु सिंचाई को शामिल किया गया। शुक्रवार को जांच कमेटी के अध्यक्ष अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई हापुड़ नवीन कुमार टीम के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचे। लेकिन सम्बंधित स्थल के आस-पास पानी भरा होने के चलते चिह्नित स्थल तक टीम नहीं पहुंच सकी। लेकिन इस दौरान जांच अधिकारियों ने मौजूद ग्रामीणों से जानकारी जुटाई । शिकायत के बिंदुओं पर जांच पड़ताल की गई और वापस चले गए।
आखिर गंगा की तलहटी मे तालाब क्यों
वैसे तो प्रकरण की शिकायत के बाद गठित कमेटी की रिर्पोट आने पर ही तलाब निर्माण के नाम पर हुए भ्रष्ट्राचार की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन ग्रामीणों के मन में एक प्रश्न कौंध रहा है कि आखिर गंगा की तलहटी के समीप तालाब बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। ग्रामीणों के मुताबिक विभाग ने जो जगह चिह्नित की वह गंगा नदी की धार के समीप थी। जो कि निर्धारित मानकों के भी विपरीत है। जिसके चलते यहां तालाब का निर्माण नहीं हो सकता था। लेकिन विभागीय मिलीभगत से तालाब निर्माण के नाम पर बंदरबाट कर लिया गया। चिह्नित जगह गंगा के समीप होने से यहां 10 माह पानी भरा रहता है।
अधिशासी अभियंता लघु सिचाई खण्ड, हापुड़ नवीन कुमार ने बताया कि मामले की जांच को गठित टीम द्वारा मेरी अध्यक्षता में मौके पर पहुंच जानकारी जुटाई है। मौके पर पानी भरा होने के चलते संबंधित स्थल तक पहुंचना संभव न हो सका। प्रकरण की गहनता से जांच जारी है। जांच पूर्ण होने पर अधीक्षण अभियंता को रिर्पोट सौंपी जाएगी।
